Home » Vikram Betal » विक्रम बेताल कि कहानियाँ- इनमें से सबसे बडा त्याग किसका – पति का, धर्मदत्त का या चोर का? | Vikram Baital ki kahaniyaInmein se sabse bada tyaag kiska – pati ka, dharamdutt ka ya chor ka ?
Vikram aur betaal
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विक्रम बेताल कि कहानियाँ- इनमें से सबसे बडा त्याग किसका – पति का, धर्मदत्त का या चोर का? | Vikram Baital ki kahaniyaInmein se sabse bada tyaag kiska – pati ka, dharamdutt ka ya chor ka ?




विक्रम बेताल कि कहानियाँ- इनमें से सबसे बडा त्याग किसका – पति का, धर्मदत्त का या चोर का? | Vikram Baital ki kahaniya- Inmein se sabse bada tyaag kiska – pati ka, dharamdutt ka ya chor ka ?

मदनपुर नगर (madanpur city) में वीरवर नाम का राजा राज किया करता था। उसके राज्य में एक वैश्य था, जिसका नाम हिरण्यदत्त (hirnaydutt) था। उसके एक कन्या थी जिसका नाम मदनसेना था।

एक दिन मदनसेना (madansena) अपनी सखियों (friends) के साथ बाग़ में गयी। वहाँ संयोग से सोमदत्त नाम के सेठ का लड़का धर्मदत्त (dharamdutt) भीअपने मित्र के साथ आया हुआ था। वह मदनसेना को देखते ही उससे प्रेम (love) करने लगा। घर लौटकर वह सारी रात उसके लिए बैचेन रहा। अगले दिन वह फिर बाग़ (garden) में गया। मदनसेना वहाँ अकेली बैठी हुइ थी। उसके पास जाकर उसने कहा, “तुम मुझसे प्रेम नहीं करोगी तो मैं प्राण दे दूँगा।”

मदनसेना ने जवाब दिया, “आज से पाँचवे दिन मेरी शादी (marriage) होनेवाली है। मैं तुम्हारी नहीं हो सकती।”

वह बोला, “मैं तुम्हारे बिना जीवित नहीं रह सकता।”

मदनसेना डर गयी। बोली, “अच्छी बात है। मेरा विवाह हो जाने दो। मैं अपने पति के पास जाने से पहले तुमसे ज़रूर मिलूँगी।”

वचन देकर मदनसेना डर गयी। उसका विवाह हो गया और वह जब अपने पति (husband) के पास गयी तो उदास होकर बोली, “आप मुझ पर विश्वास करें और मुझे अभय दान दें तो एक बात कहूँ।” पति ने विश्वास दिलाया तो उसने सारी बात आपने पति को कह सुनायी। सुनकर पति ने सोचा कि यह बिना जाये मानेगी तो है नहीं, रोकना बेकार है। उसने जाने की आज्ञा दे दी।

मदनसेना अच्छे-अच्छे कपड़े और गहने (jewelry) पहन कर चली। रास्ते में उसे एक चोर मिला। उसने उसका आँचल पकड़ लिया। मदनसेना ने कहा, “तुम मुझे छोड़ दो। मेरे गहने लेना चाहते हो तो लो।”

चोर (thief) बोला, “मैं तो तुम्हें चाहता हूँ।”

मदनसेना ने उसे सारा हाल कहा, “पहले मैं वहां हो आऊँ, तब तुम्हारे पास आऊँगी।”

चोर ने उसे छोड़ दिया।

मदनसेना धर्मदत्त के पास पहुँची। उसे देखकर वह बड़ा खुश हुआ और उसने पूछा, “तुम अपने पति से बचकर कैसे यहा आयी हो?”

मदनसेना ने सारी बात सच-सच कह दी। धर्मदत्त पर उसका बड़ा गहरा असर पड़ा। उसने उसे छोड़ दिया। फिर वह चोर के पास आयी। चोर सब कुछ जानकर ब़ड़ा प्रभावित हुआ और वह उसे घर पर छोड़ गया। इस प्रकार मदनसेना सबसे बचकर पति के पास आ गयी। पति ने सारा हाल कह सुना तो बहुत प्रसन्न (happy) हुआ और उसके साथ आनन्द से जीवन व्यतीत करने लगा।

इतना कहकर बेताल बोला, “हे राजा! बताओ, पति, धर्मदत्त और चोर, इनमें से कौन अधिक त्यागी है?”

राजा ने कहा, “चोर। मदनसेना का पति तो उसे दूसरे आदमी पर रुझान होने से त्याग देता है। धर्मदत्त उसे इसलिए छोड़ता है कि उसका मन बदल गया था, फिर उसे यह डर भी रहा होगा कि कहीं उसका पति उसे राजा से कहकर दण्ड न दिलवा दे। लेकिन चोर का किसी को पता न था, फिर भी उसने उसे छोड़ दिया। इसलिए वह उन दोनों से अधिक त्यागी था।”

राजा का यह जवाब सुनकर बेताल (baital) फिर पेड़ पर जा लटका और राजा जब उसे लेकर चला तो उसने यह कथा सुनायी|

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