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इन 7 इंडियन सुपरचोरों की अकल का सिक्का आप भी मानेगे| in 7 indian superchoro ki akal ka sikka aap bhi manoge




इन 7 इंडियन सुपरचोरों की अकल का सिक्का आप भी मानेगे  | in 7 indian superchoro ki akal ka sikka aap bhi manoge

वैसे तो हमारे दिन में आये दिन चोरियां होती रहती हैं. ज़्यादातर मामलों में पुलिस (police), चोर को पकड़ ही लेती है. लेकिन कुछ ऐसी भी चोरियां होती हैं जिनके बारे में सुन कर ही झटका लगता है और इंसान सोचने पर मजबूर हो जाता है कि “ये किया तो कैसे किया?” ऐसे ही कुछ सुपरचोरों की कहानियां (stories) हम लेकर आये हैं आपके लिए, जिन्हें पढ़ कर आपको लगेगा कि चोरी करना अक्ल का काम है बॉस.

1. अंजली माकन

अंजली माकन के ऊपर धोखाधड़ी के 2, जालसाज़ी का 2 और नकली दस्तावेज़ बनाने का 1 मामला दर्ज है. लेकिन अंजली आज की तारीख में कहां है, ये कोई नहीं जानता और इसीलिए उसका नाम CBI की मोस्ट वांटेड लिस्ट (most wanted list) में है. अंजली के बारे में ज़्यादा जानकारी किसी के पास नहीं है, लेकिन ये पक्का है कि उसने एक बैंक से 1.5 करोड़ रुपये चोरी किये हैं.

2. रुस्तम नागरवाला

इस कहानी को जान कर लगता है कि चोरी के लिए लम्बे-चौड़े प्लान या फिर गोलियों की ज़रुरत नहीं है. ज़रुरत है तो बस एक फ़ोन कॉल की. रुस्तम नागरवाला, इंडियन आर्मी का पूर्व कैप्टेन (former indian army captain) था और 21 मई, 1971 में उसने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के हेड कैशियर, प्रकाश मल्होत्रा (prakash malhotra) को फ़ोन लगाया. फ़ोन पर उसने, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (indira gandhi) की आवाज़ की नक़ल की और कहा कि किसी “राष्ट्रीय आपदा” से निपटने के लिए 60 लाख रुपयों की ज़रुरत है. अब प्रधानमंत्री (prime minister) से सवाल-जवाब कौन करे, प्रकाश मल्होत्रा, रुपयों के साथ तैयार हो गए. रुस्तम बैंक पहुंचा और रुपये लेकर चलता बना. जब हेड कैशियर ने PMO को फ़ोन करके पूरा माजरा जानना चाहा तो उसे पता चला कि ऐसी कोई मांग प्रधानमंत्री की तरफ़ से आई ही नहीं थी. पुलिस को खबर करने के एक दिन बाद ही रुस्तम (rustam) पकड़ा गया. लेकिन सोचने वाली बात ये है कि सिर्फ़ एक फ़ोन कॉल से 60 लाख रुपये चोरी करना, बच्चों का खेल नहीं है.

3. भावल सन्यासी

ये कांड उस समय हुआ था जब भारत अंग्रेज़ों के अधीन था. और इस चोरी की पटकथा किसी फ़िल्म से कम नहीं है. ढाका, बांग्लादेश (nagladesh) में भावल नाम का एक बड़ा ज़मींदारी इलाका था जहां का प्रशासन अंग्रेज़ों के हाथ में था. वहां के ज़मींदार की मृत्यु के बाद, सारी जायदाद उनके तीन बेटों को मिली. फिर ज़मींदार के दूसरे बेटे, रामेन्द्र की मृत्यु 1905 में दार्जिलिंग में हो गयी और पीछे रह गयी उसकी विधवा, बिभावती. कई सालों बाद 1921 में, एक साधु ढाका आया और जब लोगों ने उसे देखा तो पाया कि उसकी शक्ल मृत रामेन्द्र से बहुत मिलती थी. ज़मींदार की बेटी, ज्योतिर्मयी और कई दूसरे लोगों को विश्वास था कि ये साधु रामेन्द्र ही है. लेकिन अंग्रेज़ों को इस साधु पर विश्वास नहीं था और उनका मानना था कि ये कोई ढोंगी है. बिभावती ने भी उस साधु को अपना पति (husband) मानने से इंकार कर दिया. लेकिन फिर, उस साधु ने ज़मींदारी के 1/3 हिस्से की मांग की. अंग्रेज़ प्रशासन ने उस साधु को मना कर दिया और मामला अदालत (court) तक पहुंच गया. 1930 का ये केस 1946 तक चला और ब्रिटिश कोर्ट ने साधु के पक्ष में फैसला सुनाया. 30 जुलाई, 1946 को ये ख़बर साधु तक पहुंची जिसके बाद वो काली मां के मंदिर गया, जहां उसे अचानक ही दिल का दौरा (heart attack) पड़ा और दो दिन बाद उसकी मृत्यु हो गयी. रामेन्द्र की पत्नी, बिभावती के अनुसार ये देवी का ही प्रकोप था जिसने इस पाखंडी साधु की जान ले ली.

4. रबिंदर सिंह

रबिंदर सिंह, भारत की ख़ूफ़िया एजेंसी, RAW में जॉइंट सेक्रेटरी थे. 2004 में पता चला कि रबिंदर, दूसरे विभाग के ज़रूरी और गोपनीय दस्तावेज़ों (important documents) की फोटो कॉपी निकाल रहे थे. इसके बाद उन पर निगरानी रखी गयी और फ़ोन टैप किये गए. लेकिन उसी साल मई में, सिंह गायब हो गए. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ख़ूफ़िया एजेंसी CIA ने उन्हें नेपाल (nepal) के ज़रिये निकाल लिया. रबिंदर सिंह ने रुपये तो चोरी नहीं किये लेकिन देश के कई गोपनीय रहस्य दूसरों के सुपुर्द कर दिए.

5. चेलेम्ब्रा बैंक डकैती

अधिकतर ये देखा गया है कि फ़िल्में असल ज़िन्दगी की वारदातों पर आधारित होती हैं, पर इस चोरी में उल्टा हुआ. 31 दिसंबर, 2007 में, बैंक ऑफ़ केरेला (bank of kerela) की चेलेम्ब्रा ब्रांच के अधिकारियों को ज्ञात हुआ कि बैंक में चोरी हो गयी है. करीब 80 किलो सोना और 5 लाख रुपये नकद बैंक के लॉकर से गायब हैं. लेकिन इसमें ये ज़रूरी नहीं है कि बैंक में चोरी हुई, मज़ेदार बात ये है कि चोरी कैसे की गयी. इस गैंग के 4 लोगों ने बैंक के नीचे वाली मंज़िल पर एक रेस्टोरेंट किराए पर लिया और लोगों को कहा कि मरम्मत की वजह से रेस्टोरेंट (restaurant) बंद है और बाद में खुलेगा. फिर क्या, इस रेस्टोरेंट की आड़ में, उन्होंने मुख्य वॉल्ट के नीचे खुदाई की और बैंक लूट कर भाग गए. लेकिन अंत में वो सारे पकड़े गए और उन्होंने कबूल किया कि ये आईडिया (idea) उन्हें बॉलीवुड की फ़िल्म “धूम” से आया था. ज़िन्दगी फ़िल्म नहीं होती यार, यहां पकड़े जाने पर री-टेक नहीं मिलते.

6. साइबरक्राइम मास्टरमाइंड

2008 में एक भारतीय हैकर (indian hacker) ने दुनिया के सबसे बड़े साइबर क्राइम (cyber crime) को अंजाम दिया. उसने एक क्रिमिनल गैंग (criminal gang) की मदद की जिसने करीब 8 मिलियन लोगों की निजी जानकारी इंटरनेट से निकाल ली. अगर सही समय पर इसको रोका नहीं जाता तो वो गैंग करीब 2.8 बिलियन पाउंड्स की चोरी कर लेता. हुआ ये कि इस भारतीय हैकर ने UK के विख्यात वेस्टर्न होटल (western hotel) का ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम (online booking system) हैक कर लिया, जिससे जिन-जिन लोगों ने इस होटल में बुकिंग की थी, उनकी सारी जानकारी जैसे नाम, पता, क्रेडिट कार्ड नंबर वगैरह उसे मिल गयी. लेकिन स्कॉटलैंड (scotland) के संडे हेराल्ड न्यूज़पेपर को इसकी भनक लग गयी और उन्होंने तुरंत वेस्टर्न होटल के प्रशासन को खबर कर दी. चोरी तो कुछ समय के लिए टल गयी लेकिन इस भारतीय हैकर की असली पहचान आज तक सामने नहीं आई है.

7. गोहाना बैंक डकैती

ये दूसरी ऐसी डकैती है जो बॉलीवुड फ़िल्मों (bollywood movie) से प्रेरित थी. 2014 में, हरयाणा के एक गैंग ने बैंक के स्ट्रांग रूम तक 84 फुट की टनल खोद दी थी और 50 किलो सोना और करीब 4 लाख नकद लेकर भागने में कामयाब हो गए थे. लेकिन जैसे केरेला के चोरों के साथ हुआ, कुछ समय बाद ये भी पकड़े गए. फ़िल्मों से इन्होनें चोरी तो सीख ली, लेकिन भागना नहीं सीख पाये.

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