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ऐसी पत्नी, दोस्त, नौकर व घर से बचकर रहने में ही भलाई है | aise Patni Dost naukar evan ghar se bache rehne mein hi bhalai hai




ऐसी पत्नी, दोस्त, नौकर व घर से बचकर रहने में ही भलाई है  | aise Patni Dost naukar evan ghar se bache rehne mein hi bhalai hai

हमारे धर्म ग्रंथों में अनेक ऐसी बातें बताई गई हैं जो न सिर्फ हमें लाइफ मैनेजमेंट (life management) के सूत्र सिखाती हैं बल्कि यह भी बताती हैं कि हमें कैसे लोगों से संपर्क रखना चाहिए और कैसे नहीं? गरुड़ पुराण भी एक ऐसा ही ग्रंथ हैं जो हमें जीवन से जुड़ी अनेक गुप्त बातों से अवगत करवाता है, ये बातें हमारे लिए जानना बहुत ही जरूरी है।
वर्तमान समय (in the present time) में देखा जाए तो पत्नी, मित्र व नौकर हमारे परम सहयोगी होते हैं तथा स्वयं का घर होने पर हम शांति का अनुभव (feel) करते हैं। गरुड़ पुराण में इन सभी के बारे में लिखा है कि मनमानी करने वाली पत्नी, दुष्ट मित्र, वाद-विवाद करने वाला नौकर तथा जिस घर में सांप रहता है, वहां निवास करना साक्षात मृत्यु के ही समान है। जानिए ये सब किस प्रकार हमारे लिए घातक साबित हो सकते हैं-

मनमानी करने वाली पत्नी
हिंदू धर्म (hindu religion) में पत्नी को बहुत ही सम्माननीय (very respectful) माना गया है। पत्नी के साथ दुर्व्यवहार करने के बारे में सोचना भी गलत है। पत्नी को अर्धांगिनी भी कहा गया है जिसका अर्थ है शरीर का आधा भाग। लेकिन यदि पत्नी का स्वभाव (nature) मनमानी करने वाला है तो वह किसी के रूप में आपका नुकसान कर सकती है।
मनमानी से अर्थ है ऐसी पत्नी को जो अपने पति की इच्छा के विरूद्ध कार्य करती है तथा अन्य पुरुषों में भी आसक्ति रखती है। ऐसी पत्नी अपने निजी स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। इसलिए कहा गया है कि मनमानी करने वाली पत्नी के साथ रहना साक्षात मृत्यु (living with death) के समान है।

दुष्ट मित्र
जीवन में अगर कोई हमारा सच्चा हितैषी होता है वह एक मित्र ही होता है। विपत्ति के समय सबसे पहले मित्र ही हमारे साथ खड़ा होता है। हमारे धर्म ग्रंथों में ही सच्चे मित्रों (true friends) के अनेक किस्से पढऩे व सुनने को मिलते हैं। जब हम किसी दुविधा में फंस जाते हैं तो मित्र ही हमें सही रास्ता दिखाते हैं।
यदि आपका मित्र दुष्ट प्रवृत्ति (bad nature) का है तो यह वह आपके लिए सबसे बड़ा खतरा (very dangerous) बन सकता है। दुष्ट मित्र अपना हित साधने के लिए आपको गलत सलाह दे सकता है या फिर आपको शारीरिक रूप से भी नुकसान (physical loss) पहुंचा सकता है। एक गलत सलाह (wrong suggestion) और शारीरिक नुकसान दोनों ही रूप में दुष्ट मित्र साक्षात मृत्यु के समान ही है। अत: ऐसे मित्रों से बचकर (avoid these type of friends) रहना चाहिए।

वाद-विवाद करने वाला नौकर
घरों में भृत्य (दास, नौकर) रखने का प्रचलन काफी पुराना है। वर्तमान (in present) में भी संभ्रांत परिवारों में ज़रुरत के मुताबिक नौकर (employee/worker) रखे जाते हैं। नौकर न सिर्फ अपने मालिक की जरुरतों का पूरा ध्यान रखते हैं बल्कि वह घर के गुप्त भेद भी जानते हैं, लेकिन यदि नौकर वाद-विवाद करने वाला हो तो उसे तुरंत निकाल देना भी बेहतर रहता है।
वाद-विवाद करने वाला नौकर किसी भी समय आपके लिए कोई बड़ी मुसीबत (big problem) बन सकता है। यदि ऐसा नौकर आपका कोई गुप्त भेद जानता है तो वाद-विवाद होने पर वह कभी भी आपका भेद खोल सकता है। वाद-विवाद बढ़ जाने पर वह आपको शारीरिक चोट भी पहुंचा सकता है। अत: वाद-विवाद करने वाले नौकर को साथ में रखना साक्षात मृत्यु के समान है।

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