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कहानी एक परिवार की | kahani ek parivar ki




कहानी एक परिवार की | kahani ek parivar ki

कहानी एक ऐसे परिवार (family)  की जिन्होने
अपनी बदनामी होने से पहले ही शान से मौत
को गले लगा लिया ।
एक गाँव मे एक खुशहाल परिवार रहता था । उस
परिवार के बडे बेटे का विवाह marriage) बडी धूमधाम से
किया गया ।
2 वर्ष के बाद उस परिवार मेँ एक नन्ही सी परी ने
जन्म लिया । पूरा परिवार बहुत खुश था । गाँव मेँ
ढोल बजवाया गया और
मिठाईयाँ (sweets) बाँटी गयी । परी को हर कौई बहुत
प्यार करता था । उसके परिवार वाले तो जैसे
उसको देखकर ही जीते थे।
परी की छोटी बडी हर फरमाईस मूँह से निकलते
ही पूरी की जाती थी । धीरे धीरे समय
बीतता गया और परी अपने यौवन (younger age) की तरफ बड
रही थी । परी अब 15 वर्ष की हो गयी थी ।
परी वास्तव मेँ ही परी (angel) जैसी थी । परी बहुत
सुन्दर (beautiful) थी और सूशील भी ।
अब भी परिवार का प्रत्येक सदस्य उसे उसके बचपन
की तरह ही प्यार करते थे ।
उस परिवार मेँ खुशियाँ ही खुशियाँ थी । मगर
अब शायद उस परिवार
की खुशियाँ को किसी की नजर लग गयी ।
परी की जिन्दगी मेँ राज नाम का एक
लडका आया । राज और परी दोनो ही एक दूजे
को प्यार करने लगे । समय के साथ साथ
उनका प्यार भी परवान चढता गया । और एक
समय ये आया की अब वे दोनो एक पल भी अलग
नही रह पाते थे ।
करे तो क्या करेँ अब उन्हे कुछ समझ मेँ नही आ
रहा था । घरवालो (family members) को बताने की उनमेँ हिम्मत
नही थी । और अलग रहना अब सम्भव नही था ।
और फिर एक रात परी और राज दोनो घर से भाग
गये । ये सोचे बगैर कि उनके जाने के बाद उनके
घरवालो का क्या हस्र होगा ।
परी के घरवालो को जब ये
पता चला तो वो जीते जी मर गये । उन्होने
सोचा की जब गाँव (village) मेँ ये
पता चलेगा तो वो किसी के सामने मूँह दिखाने
लायक नही रहेगेँ । और उसी रात पूरे परिवार ने
जहर खाकर आत्महत्या (suicide) कर ली । परी के पिता ने
मरते मरते दीवार (wall) पे लिखा की ……
भगवान (bhagwan) अगले जन्म मेँ बेटी तो देना मगर
परी जैसी नही ।
दोस्तो क्या परी के पापा ने अपने अन्तिम समय
मे जो लिखा वो सही था ।
दोस्तो जिसने हमेँ जन्म दिया हमारी परविश
की जब किसी का प्यार पाने के लिए हम उन्हे
छोड सकते है तो उससे अच्छे का प्यार पाने के लिए
हम उसे भी छोड सकते है ।
दोस्तो हमेशा याद रखना
जो अपने माँ बाप का नही हुआ
वो किसी का नही हो सकता चाहे वह
लडकी (girl) हो या लडका (boy) हो ।
जब हमारे प्यार (love) की खातिर वह अपने माँ बाप
को छोड सकते है तो किसी अन्य के प्यार लिए
वह हमेँ भी छोड सकते है ।

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