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कहानी स्वामिभक्त सेनापति की| | Kahaani swamibhakat senapati ki




कहानी स्वामिभक्त सेनापति की| | Kahaani swamibhakat senapati ki

बहुत पहले कि बात है प्राचीनकाल में सुंदरपुर जंगल (Sunderpur Jungle) में राजा कौआ अपनी रानी के साथ एक घने पेड़ पर रहता था| वह उसे बहुत प्यार करता था|

एक दिन दोनों न जाने क्या सोचकर महल की ओर उड़ चले| वहाँ स्वादिष्ट मछली (Delicious Fish) देखकर रानी के मुहँ में पानी भर आया और उसका मान उस मछली को खाने का करने लगा| किंतु सख्त पहरा होने के कारण वे उस मछली को उठा न सके|

काफी देर इंतज़ार करने के बाद दोनों वापस अपने घोंसले में आ गए|

अगले दिन राजा कौए (King Crow) ने अपनी रानी से कहा, ‘चलो प्रिये, भोजन की खोज में चलते है|’

तो रानी बोली ‘मुझे तो उसी महल का स्वादिष्ट भोजन चाहिए अन्यथा मैं अपने प्राण यही त्याग दूँगी|’

राजा कौआ सोच में पड़ गया और चिंतन करने लगा तभी उसका सेनापति कौआ आ गया|

सेनापति कौए ने पूछ|‘क्या बात है महाराज? आप काफ़ी चिंतित लग रहे है?’

राजा ने उसे अपनी चिंता का कारण बताया|

सेनापति ने कहा, ‘महाराज आप चिंता न करे, मैं रानी को उनका मनपसंद भोजन लाकर दूँगा|’

सेनापति कौआ आठ होशियार कौओं को लेकर महल में रसोई की छत पर जा बैठा|

सेनापति ने निर्देश दिया, ‘ध्यान से सुनो| जब राजा का खाना जा रहा होगा, तो मैं ऐसी चेष्टा करूँगा जिससे रसोइए (Cook) के हाथ से थाल गिर जाए| तुममें से चार अपनी-अपनी चोंच में चावल भर लेना और चार अन्य मछली| फिर जंगल में रानी के पास उड़ जाना| वह रसोइया जैसे ही आँगन में आएगा तब मैं उस पर झपट्टा मार दूँगा|’

कुछ देर बाद जैसे ही रसोइया खाना लेकर आँगन में पहुँचा तो सेनापति कौए ने अपनी चोंच रसोइए के सिर में दे मारी जिस से की रसोइए के हाथ से थाल छुट गया|

थाल के गिरना ही था के आठों कौए अपनी-अपनी चोंच भरकर उड़ गए|

उधर सिपाहियों (Sipahiyo) ने सेनापति कौए को पकड़ लिया| तो सेनापति कौआ सोचने लगा, कोई बात नही मेरा चाहे कुछ भी हो जाए, मगर रानी (Queen) की इच्छा तो पूरी हो गई|

फिर सेनापति कोए राजा के पास ले जाया गया|

‘ऐ कौए! तूने मुझे नाराज़ करके अपनी जान ख़तरे में डाली| बता तूने ऐसा क्यों किया ?’

‘आपके थाल का भोजन हमारी कोए रानी को चाहिए था| मैंने उन्हे उनकी पसंद का खाना लाने का वचन दिया था और अब उसे पूरा किया है…बस| अब मैं आपकी कैद में हूँ, आप जो सज़ा देना चाहें मुझे मंजूर होगी|’ इतना कहकर सेनापति कौआ खामोश हो गया|

यह सुनकर राजा खुश हुआ और बोला ‘ऐसे स्वामिभक्त को तो उपहार मिलना चाहिए…सज़ा नही| राजा ने सिपाहियों (Guards) से कहा इसे आज़ाद कर दो…और सुनो…आज से जो भी खाना मेरे लिए बनेगा, उसमें से तुम्हारे राजा, रानी व तुम्हारे लिए हिस्सा भेजा जाएगा और तुम्हारी प्रजा के लिए भी ढेर सारा चावल रोजाना पका करेगा|’

सेनापति कौआ राजा को प्रणाम करके वापस जंगल में अपने राजा के पास पहुँच गया|

शिक्षा: स्वामिभक्ति की कदर सभी जगह होती है चाहे इनसान (Human) हो जानवर (Animal) हो या परिंदा (Bird) | यदि आपने किसी के प्रति निष्ठा रखी है तो उस पर जान तक देने को तैयार रहना चाहिए| सेनापति कौए ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया और इसीलिए वह उस राज्य के राजा की निगाहों में भी चढ़ गया|

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