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क्या हमारी होनेवाली संतान भाग्यशाली हो सकती है? | Kya hamari hone wail santaan bhagyashaali ho sakti hai




क्या हमारी होनेवाली संतान भाग्यशाली हो सकती है? | Kya hamari hone wail santaan bhagyashaali ho sakti hai

सामान्य (Normally) रूप से जीवन में सफलता का अर्थ ऐश्वर्य, वैभव, धन, मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा योग्य जीवनसाथी (Life Partner) और कुल का नाम रोशन करने वाली संतान पर होता है। हम मनुष्यों को सफलता और असफलता का श्रेय या दोष भाग्य को देने की आदत होती है। पर, हम जानने की कोशिश नहीं करते कि आखिर यह भाग्य निर्मित कैसे होता है।

हम अक्सर देखते हैं कि मजदूर का बेटा या बेटी अधिकारी बन जाता है और किसान के बच्चे मंत्री बन जाते हैं। आखिर कैसे निर्मित होते हैं ये योग्य योग! आखिर इन्हें ऐसी विशेषता कैसे हासिल हो जाती है कि ये भीड़ से अलग हो जाते हैं। हम चाहते तो हैं कि हमारी जन्म लेने वाली संतान (Kids) बहुत आगे बढ़े, राजयोग प्राप्त करे, लेकिन सामान्य व्यक्ति कभी भी यह मार्ग जानने का प्रयास नहीं करता, जिससे उसकी आनेवाली संतान यश और प्रतिष्ठा प्राप्त करे। हालांकि, संतान प्राप्ति के बाद हम उसकी शिक्षा-दीक्षा का विशेष ख्याल रखते हैं। बच्चे को बेहतर स्कूल और साधन उपलब्ध कराते हैं, पर कई बार शायद ये सारे प्रयास सफल नहीं हो पाते। और वही सैकड़ों उदाहरण (Hundred of Examples) ऐसे भी हैं कि बच्चे फुटपाथ पर लैंप शेड के नीचे पढ़ाई करते हुए टॉप पर पहुंच गए। यानी कुछ लोग छोटे-छोटे या थोड़े से प्रयासों से आगे निकल जाते हैं और कुछ लोग सिर्फ संघर्ष करते रह जाते हैं। हम अक‍सर सुनते हैं और कहते भी हैं कि उसका भाग्य (Future) बहुत अच्छा है या वह बहुत किस्मत वाला है, पर ये कौन से लोग होते हैं जिनका भाग्य इतना अच्छा हो जाता है। आखिर कैसे इनका भाग्य इतना प्रबल हो जाता है!

ज्योतिष (Jyotish) में वैसे तो बहुत सारे शुभ योगों का उल्लेख है, लेकिन कैसे बनते हैं शुभ योग! क्या हमारी होनेवाली संतान भाग्यशाली हो सकती है? क्या हमारे बच्चे उच्च पदों तक पहुंच सकते हैं? आइए जानने का प्रयास करते हैं कि आखिर क्या रहस्य है एक सफल बच्चे के जन्म का।

भविष्य को प्रभावित करते हैं उनका जन्म माह

मैंने अपने विशिष्ट शोध में पाया कि जिन व्यक्तियों का जन्म अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर ( October, November and December) में होता है, उनके भीतर कुछ विशिष्ट क्षमताएं और विशेषताएं होती हैं। उनकी मानसिक शक्ति (Mental Power) अन्य माह में जन्मे लोगों से कुछ अलग होती है। उनके भीतर कुछ अलग तरह के प्रतिभाएं पाई जाती हैं। ये लोग दूर की सोच रखने वाले तथा अपनी छवि (Shadow) या वक्तव्य को लेकर बेहद सजग होते हैं।

शायद इसीलिए सम्पूर्ण विश्व के बेहद सफल लोगों में इस महीने में जन्म लेने में जन्मे लोगों की अधिकता होती है। इसे यूं कह लें कि इस माह में पैदा हुए लोग अन्य लोगों से ज्यादा सफल होते हैं।

कार्तिक, मार्गशीर्ष और पौष माह भारतीय समाज (Indian Culture) में अत्यंत पवित्र माह माने जाते हैं। मार्गशीर्ष माह का अर्थ ही है ‘शीर्ष पर पहुंचने का मार्ग।’ इस माह में जन्मे लोगों का नजरिया भौतिक सफलता को लेकर बेहद गहरा होता है। इनके भीतर भौतिक सुख-साधनों और समृद्धि से लेकर एक विशिष्ट तरह की समझ होती है। जो गर्भ फरवरी, मार्च व अप्रैल माह (January, February and March)में यानी माघ, फाल्गुन और चैत्र माह में धारण किए जाते हैं वह बच्चे विशाल व्यक्तित्व के मालिक और जीवन में सफल होते हैं। ऐसी नहीं कि इन इन काल में जन्मे व्यक्तियों के जीवन में संघर्ष नहीं होता, पर इन व्यक्तियों की संघर्ष क्षमता में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है। इन माहों में जन्मे लोग संघर्ष भी एक स्तर के ऊपर ही रहकर करते हैं। यदि इनके कार्य और आचर्ण शुद्ध हों तो ये निरंतर उन्नति करते रहते हैं।

सिर्फ इन महीनों में गर्भ धारण करना या जन्म लेना ही पर्याप्त नहीं है। सफलता तो संस्कार, विचार और कर्म पर निर्भर करती है, पर उपरोक्ट महीनों में जन्म लेने से इनकी क्षमता में अवश्य वृद्धि होती है और क्षमता ही सफलता की गारंटी है।

मुख्य शुभ नक्षत्र

मेरे व्यक्तिगत अध्ययन से यह भी ज्ञात हुआ है कि कुछ ऐसे नक्षत्र हैं, जिनमें उत्पन्न संतान भाग्यशाली और धनवान होती हैं। इन विशेष नक्षत्रों में पैदा हुए लोग ऐश्वर्यशाली, प्रभावशाली और संपदा के मालिक होते हैं। दरअसल, इन कुछ विशेष नक्षत्रों में जन्मे लोगों की मानसिक भमता और मस्तिष्क (Brain) संरचना अन्य लोगों से भिन्न होती है। इनकी दूरदृष्टि, इनका व्यक्तित्व, इनका मानसिक संतुलन, इनकी संघर्ष क्षमता, इनके रूप-रंग का आकर्षण सामान्य लोगों से अलग होता है। अपनी इन्हीं योग्यताओं के बल पर ऐसे लोग जीवन में आसानी से सफलता के शिखर को चूमते चले जाते हैं।

यदि वह नक्षत्र कुछ विशेष पर्व या विशिष्ट योगों में आते हैं तो इनका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर माह में इन नभत्रों के प्रभाव में वृद्धि हो जाती है।

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