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क्यों आता है भूकंप? | Kyon aate hai bhookamp | Why earthquake comes | How earthquake comes




क्यों आता है भूकंप? | Kyon aate hai bhookamp | Why earthquake comes | How earthquake comes

धरती मुख्य तौर पर चार परतों (4 layers) से बनी हुई है, इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट (crust) और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर (lithosphere) कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट दूसरी के नीचे आ जाती है।

क्यों टकराती हैं प्लेटें?

दरअसल ये प्लेंटे बेहद धीरे-धीरे घूमती रहती हैं। इस प्रकार ये हर साल 4-5 मिमी अपने स्थान से खिसक जाती हैं। कोई प्लेट दूसरी प्लेट के निकट जाती है तो कोई दूर हो जाती है। ऐसे में कभी-कभी ये टकरा (collapse) भी जाती हैं।

भूंकप के केंद्र और तीव्रता का क्या मतलब है?

भूकंप का केंद्र वह स्थान होता है जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा (energy) निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन (vibrations) ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल (rector scale) पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।

भूकंप की गहराई से क्या मतलब है?

मतलब साफ है कि हलचल कितनी गहराई पर हुई है। भूकंप की गहराई (deep) जितनी ज्यादा होगी सतह पर उसकी तीव्रता उतनी ही कम महसूस होगी।

क्या भारत को भूकंप का सर्वाधिक खतरा है?

इंडियन प्लेट हिमालय से लेकर अंटार्कटिक (antarctic) तक फैली है। यह पाकिस्तान बार्डर (pakistan border) से सिर्फ टच करती है। यह हिमालय के दक्षिण में है। जबकि यूरेशियन प्लेट हिमालय के उत्तर में है। इंडियन प्लेट (indian plate) उत्तर-पूर्व दिशा में यूरेशियन प्लेट जिसमें चीन (china) आदि बसे हैं कि तरफ बढ़ रही है। यदि ये प्लेट टकराती हैं तो भूकंप का केंद्र भारत में होगा।

भारत में कौन क्षेत्र भूकंप के हिसाब से ज्यादा खतरे में हैं?

भूंकप के खतरे के हिसाब से भारत को चार जोन में विभाजित किया गया है। जोन दो-दक्षिण भारतीय क्षेत्र जो सबसे कम खतरे वाले हैं। जोन तीन-मध्य भारत, जोन चार-दिल्ली समेत उत्तर भारत का तराई क्षेत्र, जोन पांच-हिमालय क्षेत्र और पूर्वोत्तर क्षेत्र तथा कच्छ। जोन पांच सबसे ज्यादा खतरे (very dangerous) वाले हैं।

भूकंपीय माइक्रोजोनिंग क्या है?

देश में भूकंप माइक्रोजोनिंग (micro zoning) का कार्य शुरू किया गया है। इसमें क्षेत्रवार जमीन की संरचना आदि के हिसाब से जोनों के भीतर भी क्षेत्रों को भूकंप के खतरों के हिसाब से तीन माइक्रोजोन में विभाजित किया जाता है। दिल्ली, बेंगलूर समेत कई शहरों की ऐसी माइक्रोजोनिंग हो चुकी है।

भूकंप को नापने का पैमाना क्या है?

भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है। रिक्टर स्केल पर 5 से कम तीव्रता वाले भूकंपों को हल्का माना जाता है। साल में करीब 6000 ऐसे भूकंप आते हैं। जबकि 2 या इससे कम तीव्रता वाले भूकंपों को रिकॉर्ड करना भी मुश्किल होता है तथा उनके झटके महसूस भी नहीं किए जाते हैं। ऐसे भूकंप साल में 8000 से भी ज्यादा आते हैं।

कौन से भूकंप खतरनाक होते हैं?

रिक्टर स्केल पर आमतौर पर 5 तक की तीव्रता वाले भूकंप खतरनाक नहीं होते हैं, लेकिन यह क्षेत्र की संरचना पर निर्भर करता है। यदि भूकंप का केंद्र नदी का तट पर हो और वहां भूकंपरोधी तकनीक के बगैर ऊंची इमारतें बनी हों तो 5 की तीव्रता वाला भूकंप भी खतरनाक हो सकता है।

भूकंप के खतरे से कैसे बच सकते हैं?

ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप से बहुत ज्यादा नुकसान होता है, लेकिन तेज भूकंप में भी इससे होने वाले नुकसान (loss) को कम किया जा सकता है। भूकंप के नुकसान से बचने के लिए घरों को भूकंप रोधी बनाएं। जिस स्थान पर घर बना रहे हैं उसकी जांच करा लें कि वहां जमीन की संरचना भूकंप के लिहाज से मजबूत है या नहीं। यदि घर पुराने (old houses) हैं तो रेट्रोफिटिंग के जरिये उसे भूकंपरोधी बना सकते हैं। यह तकनीक उपलब्ध है। इसमें दीवारों को पास में जोड़ा जाता है।

यदि अचानक भूकंप आ जाए तो क्या करें?

घर से बाहर खुले में निकलें। घर में फंस गए हों तो बेड या मजबूत टेबल (table) के अंदर छिप जाएं। घर के कोनों में खड़े हो सकते हैं और कोई उपाय नहीं हो तो छत में भी जा सकते हैं। लिफ्ट (lift) की जगह सीढि़यों (ladders) का इस्तेमाल करें।

क्या भूकंप की भविष्यवाणी संभव है?

नहीं, दुनिया में अभी वैज्ञानिक (scientist) सफल नहीं हुए हैं। सिर्फ यह बताया जा सकता है कि कौन सा क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है। हालांकि कई बार ऐसा होता है कि कई क्षेत्रों में पहले भूकंप के छोटे झटके आते हैं फिर उसके बाद बड़े झटके आते हैं। भूकंप आने के बाद अगले 24 घंटों तक भूकंप के झटके फिर लगने का खतरा रहता है। भूकंप के भविष्वाणी को लेकर शोध हो रहे हैं और उम्मीद की जानी चाहिए कि कभी इस दिशा में भी वैज्ञानिक सफल हों।

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