Home » Desi Nuskhe » क्य आप जानते है उपवास और ताली बजाने का महत्व, अगर नहीं तो अवश्य देखे | Kya aap jante hai upvaas aur taali bajane ka mahatva, agar nahi to avashya dekhe
क्य आप जानते है उपवास और ताली बजाने का महत्व, अगर नहीं तो अवश्य देखे | Kya aap jante hai upvaas aur taali bajane ka mahatva, agar nahi to avashya dekhe
क्य आप जानते है उपवास और ताली बजाने का महत्व, अगर नहीं तो अवश्य देखे | Kya aap jante hai upvaas aur taali bajane ka mahatva, agar nahi to avashya dekhe

क्य आप जानते है उपवास और ताली बजाने का महत्व, अगर नहीं तो अवश्य देखे | Kya aap jante hai upvaas aur taali bajane ka mahatva, agar nahi to avashya dekhe




क्य आप जानते है उपवास और ताली बजाने का महत्व, अगर नहीं तो अवश्य देखे | Kya aap jante hai upvaas aur taali bajane ka mahatva, agar nahi to avashya dekhe

उपवास और ताली बजाने का महत्व

उपवास- उपवास का महत्व सभी धर्मों (religions) में माना जाता है। जिस तरह उपवास की धार्मिक तौर पर मान्यता है उसी तरह शारीरिक स्वास्थ्य (physical fitness) के लिए भी यह बहुत खास माना जाता है।

उदाहरण- नवरात्रों के दिनों में जब हम पूरे नौ दिनों तक उपवास करते हैं तो उस समय सिर्फ फलाहार का सेवन (eating fruits only) किया जाता है। इससे क्या होता है कि नौ दिनों तक सिर्फ फलाहार का सेवन करने के कारण शरीर की जो वेस्टेज (wastage) थी वो बाहर निकल गई तथा बाहर की कोई वेस्टेज शरीर में नहीं बन पाई। इससे क्या होगा कि न तो शरीर में वेस्टेज जमा होगा|
सामान्यतः कोई भी व्यक्ति शरीर में वेस्टेज जमा होने से रोगग्रस्त हो जाता है।

शरीर में जब भी किसी तरह की गड़बड़ी (problem) पैदा होती है तो शरीर हमे उसका इंडीकेशन (indication) दे देता है और इसमें सबसे पहला इंडीकेशन आता है कि हमारी भूख कम हो गई है। ऐसे में यदि हमे खाने के लिए कहा जाता है तो खाना खाने की बिल्कुल भी इच्छा जागृत नहीं होती। प्रकृति (nature) कहती है कि अगर आपकी पचास प्रतिशत भूख कम हो गई हो तो आप एक समय का खाना छोड़ दें। इससे आप जीवन में कभी बीमार (fever/ infected) नहीं पड़ेंगे। लेकिन हम क्या करते हैं कि जिस दिन हमे इस तरह का इंडीकेशन मिलता है, हम उस दिन चटपटी चीजें मंगाकर या बनवाकर खा लेते हैं।

यदि हम यहां पर चूक जाते हैं- जिसे मेडिकल भाषा (medical language) में बीमारी और नेचरपैथी में शरीर की क्रियाएं बोलते हैं, उस पर ध्यान नहीं देते हैं तो वह बड़ी बीमारी के रूप में प्रकट हो जाता है। यदि पेट में विकार हो गया हो तो विकार होने के बाद भोजन डाईजेस्ट नहीं हो पाएगा। ऐसे में शरीर के विकार को निकालने के दो रास्ते हैं- पहला लैट्रिन के रास्ते और दूसरा मुंह के रास्ते। यदि लैट्रिन के रास्ते विकार को बाहर निकालते हैं तो उसे लगभग 33 फुट लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है। जबकि इस विकार को मुंह के रास्ते निकालने के लिए लगभग एक फुट की दूरी तय करनी पड़ती है अर्थात उल्टी (vomiting) करनी पडती है।

यदि अपने आप उल्टी आती है तो आने दें और अगर नहीं आती है तो पानी पीकर उल्टी करें। उल्टी जितनी मर्जी हो उतनी करें तो इसका कोई नुकसान नहीं है बल्कि इससे शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है। इसी तरह यदि लूजमोशन (loose motion) हो जाए तो उसे दवाओं से दबाना नहीं चाहिए। भरपेट पानी पीएं और जैसे ही लैट्रिन आए तुरंत ही लैट्रिन जाएं। इस तरह से पूरी आंतें साफ हो जाएगी। लेकिन अक्सर हम दवाईयों (medicines) के प्रयोग से इसे दबा देते हैं जिससे यह रुक जाता है और शरीर में जमा होकर पुराना रोग बन जाता है। डायबिटीज, स्टोन, ट्यूमर आदि रोग शरीर से निकलने वाले विकार को दबाने का ही नतीजा है। नहीं तो ट्यूमर (tumor) एक दिन में नहीं बन जाता, वर्षों लगते हैं उसे बनने में।

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