Home » Gyan » खाना | Khaana
khaana
khaana

खाना | Khaana




खाना | Khaana

इस संसार में मानव जाति के खाने कि चीजों कि कोई कमी नहीं है| परन्तु खाने के लिए प्रकृति ने जो पेट मानव को दिया है, उसके खाने कि अवश्य एक सीमा होती है जो लोग उस खाने कि सीमा से बाहर जाते है मतलब के ज्यादा खा लेते है वोह लोग रोगी बन जाते है|

ऐसे लोगो को अक‍सर यह कहते सुना गया है के – भैय्या सुख दुःख तो जीवन का ही एक हिस्सा है  जैसे सुख हमेशा नही रहता वैसे दुःख भी हमेशा नही रहता|ऐसी बातें केवल कहने के लिए ही होती है| वरना सत्य बात तो यह है के जब हम प्रकृति के नियमों कि सीमा को पर कर जाते है तो ही हम रोगी बनते है|

रोग ही मानव का सबसे बड़ा शत्रु है जब भी इनसान हर मानता है तो असल में वह इन बीमारियों से ही हार मानता है, यही रोग इनसान के लिए चिंता का कारण बन जाते है, और एक दिन यही चिंता चिता में बदल जाती है| इसलिए मैं धार्मिक.इन के माध्यम से आपको यही सलाह दूँगा के आपने खाने की सीमा को पह्चानो   और एक सीमा में ही रह कर खाओ | स्वाद के चक्कर में अमृत तुल्य भोजन को आप पेट में विष में ना बदल दो|

अमृत और विष का अंतर तो सब जानते ही है, उन सबको पता है अमृत जीवन है तो विष मृत्यु है| भोजन को जब पेट कि सीमा तक खाया जाएँ तो वोह अमृत तुल्य है और सीमा से अधिक खाया जाए तो वही खाना विष के समान है| माना के भोजन सुखी जीवन व्यतीत करने का एक आधार है| पर इस बात का भी आपको ध्यान रहना चाहिए के कितने भोजन से आपका शरीर ठीक से चल सकता है|

जितना खाना आप खा सकते है उस से थोड़ा कम ही खाना चाहिए भूख से ज्यादा खाने पर खाना विष के समान ही होता है| इस से कई तरह की गंभीर बीमारियाँ आपको आने वाले समय में आपको घेर लेती है| हमरे पास आज के युग में हर प्रकार का सहित्य उपलब्ध है परन्तु इस प्रकार का कोई साहित्य नहीं है और ना ही किसी बुद्धिजिवि ने इस और ध्यान के कुछ ऐसा लिखा जाए जिस से लोगो को पता चल सके के एक वक्त में किस तरह का और कितना खाना खाना चाहिए|

घर का बना खाना ही खाए, जितना हो सके बाहर कि चीजें खाने से बचे, तली हुयीं चीजें खाने से बचे, दूध दही अधिक खाए, फ्रूट और जुस अधिक ले, खाना खाने के बाद हलकी फुलकी सैर अवश्य करे, मांस खाने से बचे, क्या आपका पेट कब्रिस्तान है जहां आप मरे हुए जानवरों को दफन करते है ?

जब आप ठीक होते हो तब तो किसी कि बात सुनते नहीं पर जब आपकी तबीयत खराब हो जाती है तो आप हर किसी कि बात सुनने लग जाते है, तो आपको नहीं लगता के लोगो कि बात पहले ही सुन लेनी चाहिए ? अपने खाने पीने का तरीका सुधारे नहीं तो डॉक्टर के पास जाकर उसकी मनमर्जी कि फीस उसे देकर कड़वी दवाइयाँ खाइये|इसी प्रकार आप हर बार बीमार होकर डॉक्टर के पास जाते रहोगे और अपने शरीर को हर बार पहले से भी कमजोर कर लोगे|

खाने में सुबह और दोपहर दही का सेवन जरूर करे, रात में दही और चावल खाने से बचे, 9 बजे से पहले खाना खा ले और सैर अवश्य करे| पानी खाना खाने के 20-30 मिनट बाद ही पीये| अगर खाने के साथ पानी जरूरी है तो कम से कम पानी पीये| हो सके तो गर्म पानी पीये इस से पेट पर चर्बी नहीं बनती|उम्मीद है मैं ज्यादा नहीं तो कुछ तो आपको खान पान के बारे में समझा सका| मुझे खुशी होगी अगर आप इन बातों को अपने असली जीवन में अमल में लेकर आओगे |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*