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चारधाम तक पहुंचने का मार्ग है यह गुफा – chaardham tak pahunchane ka marg hai yeh gufa




चारधाम तक पहुंचने का मार्ग है यह गुफा – chaardham tak pahunchane ka marg hai yeh gufa

कहते है अगर संसार में रहते हुए मोक्ष पाना है तो चार-धामों की यात्रा कर लो. यूं तो ये चारों धाम अलग-अलग दिशाओं में स्थित है और उन तक पहुंचने का रास्ता भी अलग ही निकलता है लेकिन क्या आप यकीन करोगे कि भारत में एक ऐसी गुफा (cave) है जहां से इन चारों धामों तक पहुंचने का रास्ता जाता है.

प्राचीन उज्जैन को उज्जयिनी के नाम से जाना जाता था. उज्जयिनी के परम प्रतापी राजा (king) हुए थे विक्रमादित्य. विक्रमादित्य के पिता महाराज गंधर्वसेन थे और उनकी दो पत्नियां थीं. एक पत्नी के पुत्र विक्रमादित्य और दूसरी पत्नी के पुत्र थे भर्तृहरि. गंधर्वसेन के बाद उज्जैन का राजपाठ भर्तृहरि को प्राप्त हुआ, क्योंकि भर्तृहरि विक्रमादित्य से बड़े थे. राजा भर्तृहरि धर्म और नीतिशास्त्र के ज्ञाता थे. मध्य प्रदेश (madhya pradesh) का उज्जैन शहर न सिर्फ अपने विश्व प्रसिद्ध मंदिरों (known for famous temples) के लिए जाना जाता है बल्कि यहां कई ऐसे रहस्यमय स्थान भी है, जो लोगों को बरबस ही अपनी ओर खींचते हैं. उज्जैन (ujjain) में ऐसा ही एक स्थान है राजा भृर्तहरि की गुफा. यह गुफा मुख्य नगर से थोड़ी दूरी पर शिप्रा नदी के तट पर एक सुनसान क्षेत्र में स्थित है. यह गुफा नाथ संप्रदाय के साधुओं का साधना स्थल है. गुफा के अंदर जाने का रास्ता काफी छोटा है.

गुफा में प्रवेश करते ही सांस लेने में कठिनाई महसूस (feeling difficulty) होती है. गुफा की ऊंचाई भी काफी कम है, अत: अंदर जाते समय काफी सावधानी रखनी होती है. यहां प्रकाश भी काफी कम है, अंदर रोशनी के लिए बल्ब (bulb) लगे हुए हैं. इसके बावजूद गुफा में अंधेरा दिखाई देता है. गुफा में भर्तृहरि की प्रतिमा के सामने एक धुनी भी है, जिसकी राख हमेशा गर्म (hot) ही रहती है. राजा भृर्तहरि के साधना स्थल के सामने ही एक अन्य गुफा भी है. मान्यता है कि इस गुफा से चारों धामों के लिए रास्ता जाता है. यहां के स्थानीय निवासियों के लिए इसकी बहुत मान्यता है, इतना ही नहीं सम्पूर्ण भारत वर्ष से भी हजारों लोग यहां चारों धामों की यात्रा के लिए आते हैं और इस रहस्यमयी गुफा को मोक्ष स्थल तक पहुंचने की पगडंडी मानते हैं.

भारतीय समाज में गुफाओं के रहस्य को माना जाता है और कहा जाता है कि भारत में जितनी मशहूर गुफाएं हैं वो किसी ना किसी देवी-देवता से संबंध रखती हैं. शायद इसी कारण लोग देवी-देवताओं के दर्शन करने के लिए गुफाओं में जाते हैं और साथ ही लोगों का इन गुफाओं पर विश्वास (trust) इतना ज्यादा होता है कि लोगों को लगता है कि पवित्र गुफाओं में जाकर जो भी इच्छा की जाएगी वो पूर्ण हो जाएगी.

ऐसी ही कुछ रहस्यपूर्ण और जोखिम भरी गुफा है नागराज गुफा….जहां बस वो ही व्यक्ति जा सकता है जो जिन्दगी में जोखिम उठाना जानता हो. नागाराज की गुफा तक पहुंचने का रास्ता अमरनाथ की गुफा से भी कठिन माना जाता है. नागराज की गुफा तक पहुंचने के रास्ते में ऐसी कठिनाइयों का सामना (facing problems) करना पड़ता है जिसे व्यक्ति ने कभी भी किसी यात्रा के द्वारा नहीं किया होता है. हैरानी इस बात की है कि नागराज की गुफा तक पहुंचने वाले व्यक्तियों की नागराज गुफा में इतनी श्रद्धा होती है कि वे इस गुफा तक पहुंचने के लिए किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं.

पर कहते हैं ना यदि व्यक्ति में जोखिम उठाने की क्षमता है फिर तो चाहे नागराज गुफा पर चढ़ते और उतरते समय सांप ही क्यों ना आ जाए पर व्यक्ति को डर नहीं लगता. मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी पर सतपुड़ा की पहाडिय़ों (mountain of satpura) में स्थित है नाग गुफा और यहां भोपाल के रास्ते से भी पहुंचा जा सकता है. पहाड़ियों से घिरी हुई है नागाराज की गुफा और घने जंगल (jungle/forest) के रास्तों को पार करते हुए नागराज की गुफा तक जाना होता है. नागपंचमी के दिन नागद्वार के आसपास एक खूबसूरत सा मेला (mela/festival) लगता है पर नागपंचमी पर नागद्धार के पास इतनी भीड़ होती है कि बहुत कम व्यक्ति ही नागपंचमी पर नागद्धार जाने का साहस दिखा पाते हैं.

नागद्वार या नागद्वारी दुनियाभर के हिंदू धर्मप्रेमियों का एक ऐसा स्थल है, जहां आने की सब कामना (wish) करते हैं, लेकिन इच्छा कम ही की पूरी होती है. नागद्वारी में चिंतामणि की गुफा है, जो लगभग 100 फीट लंबी है, जिसमें नागदेव की मूर्तियां हैं.

स्वर्गद्वार चिंतामणि से लगभग आधा किमी दूरी पर स्थित एक गुफा है, जिसमें भी नागदेव की मूर्तियां हैं. ऐसी मान्यता है कि जो लोग नागद्वार जाते हैं, उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है. नागद्धार तक पहुंचने की सबसे खास बात यह है कि ऊंची-नीची दुर्गम पहाडिय़ों के बीच बने रास्तों पर यात्रियों (travelers) के लिए किसी तरह का आश्रय स्थल नहीं है. जिसका अर्थ यह है कि बस लगातार चलते जाना है. यहां तक कि उन्हें खड़ा होने और बैठने के लिए भी स्थान (place) नहीं मिलता है. पर इन सब कठिनाइयों को उठाने के बाद भी यात्री नागद्धार की गुफा तक पहुंचने के रास्ते में आनंद प्राप्त करते हैं. नागद्धार की गुफा के आसपास अधिकांशतः ठंडक (mostly cold)होती है जिसमें यात्रा करने का आंनद यात्री उठा पाते हैं. कुछ बातों पर आज भी हैरानी होती है कि आज के समय में भी ऐसे लोग हैं जो पूरी श्रद्धा के साथ एक गुफा के दर्शन के लिए जाते हैं पर सोचने वाली बात यह है कि गुफा तक पहुंचने वाले रास्ते में जितनी भी कठिनाइयां आती हैं यात्रियों को उनसे डर (fear) नहीं लगता है.

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