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जब किसी को गुरु बनाएं तो जरूर देखें ये गुण | Jab kisi ko guru banaye to zaroor dekhe yeh gunn




जब किसी को गुरु बनाएं तो जरूर देखें ये गुण | Jab kisi ko guru banaye to zaroor dekhe yeh gunn

हर इंसान के दिल में अपनी प्रकृति (nature) के अनुसार विचार पनपता है। उसी विचार के अनुसार वह काम करता है। महादेवी वर्मा जब भागलपुर (bhagalpur) में अपने पिता के घर पर रहकर कॉलेज (college) की पढ़ाई कर रही थीं। तभी अचानक उनके दिल मे एक भिक्षुणी स्वरूप की परिकल्पना आई। उन्होंने लंका के बौद्ध विहार (bodh vihar) में महास्थविर को पत्र लिखा- मैं भिक्षुणी बनना चाहती हूं। दीक्षा हेतु लंका या भारत, जहां आदेश हो वहां आ जाऊं। वहां से उत्तर आया- मैं भारत आ रहा हूं, नैनीताल (nainital) में ठहराव होगा, आप चाहें तो मिल सकती हैं। महादेवीजी ने अपने हिस्से आई सारी सम्पति दान (donate) कर दी और दीक्षा लेने नैनीताल पहुंच गई। उन्होने देखा कि एक सिंहासन पर गुरुजी विराजमान थे।

उन्होंने अपने चेहरे को पंखे से ढक रखा था। महादेवीजी उन्हें देखने के लिए जिस तरफ से चेहरा खुला था उस तरफ गई। इसी बीच फिर गुरुदेव ने महादेवी जी के विपरीत दिशा (opposite direction) में अपने मुंह को करके मुंह को पंखे से ढक लिया। इस तरह बातों ही बातों में महादेवी जी ने गुरुजी का चेहरा देखने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन वह ये न कर पाईं, उन्हे यह बहुत खला। इसके बाद जब वे घर वापिस जाने लगी, तब वह अपने सचिव से पूछ बैठी- क्या कारण है कि ये महास्थविर अपने चेहरे पर पंखा रखते हैं। सचिव बोला उन्होंने एेसा प्रण कर रखा है कि अपने जीवन में स्त्री का चेहरा (womens face) भी नहीं देखेंगे। महादेवी ने जब सचिव की बात सुनी तो उनके आश्चर्य की कोई सीमा नहीं रही।उन्होंने कहा –मैं तो इन्हें अपना गुरु बनाने आई थी।

भिक्षुणी बन जीवन को भगवान के प्रति समर्पित करने आई थी मगर यहां तो स्थिति ही दूसरी है। जब गुरु की मानसिक स्थिति ऐसी है तो फिर उनकी शिष्यता ग्रहण कर मुझे कैसे ज्ञान प्राप्त हो सकता है। उन्हें अपने निर्णय पर बेहद पछतावा होने लगा। उन्होंने उसी क्षण कहा- ऐसे कमजोर दिल (weak heart) के व्यक्ति को मैं अपना गुरु नहीं बना सकती। गुरु का व्यक्तित्व (personality) तो महिला-पुरुष जैसे लिंग भेद से परे होता है। गुरु तो ऊपरी शक्ति से जुड़ा वह माध्यम है जिस पर शिष्य आंख मूंद कर भरोसा कर सके। गुरु को आत्मा देखना चाहिए शरीर नहीं, लेकिन यहां तो उल्टा (opposite) ही है। उन्हें सोचना चाहिए कि आत्मा (soul) न तो स्त्री है और न ही पुरुष। उन्होंने उसी समय प्रण लिया कि अब मैं फिर कभी इनके पास नहीं आऊंगी।

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