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जानिये कुछ सामान्य नियम वास्तु निर्माण के| Jaaniye kuch samanya niyam vastu nirman ke




जानिये कुछ सामान्य नियम वास्तु निर्माण के| Jaaniye kuch samanya niyam vastu nirman ke

घर के किसी भी तरफ सड़क हो, मकान निर्माण के कुछ सामान्य नियम (normal rules) अपनाकर मकान का वास्तु-शास्त्र के अनुसार निर्माण किया जा सकता है और इस प्रकार के निर्माण से लाभ उठाया जा सकता है । मकान निर्माण के कुछ नियम नीचे दिये गये हैं-

1. घर के उत्तर और पूर्व में ज्यादा खाली जगह (vacant place) तथा दक्षिण और पशिचम में कम खाली जगह छोड़ें ।

2. घर में कुऑं या बोरिंग उत्तर पूर्व में ही होनी चाहिये । जमीन के अंदर पानी की टंकी (underground water tank) होने पर यह भी इस तरफ ही हो ।

3. सेप्टिक टैंक (septic tank) सिर्फ उत्तर पूर्व के ठीक बीच में ही हो । अन्य किसी दिशा में होने पर दुष्परिणाम होंगे ।

4. पानी की टंकी जमीन के ऊपर होने पर यह दक्षिण पशिचम में मकान के ऊपर ही रखें । मकान में सबसे ऊँचा निर्माण (construction) दक्षिण पशिचम में ही होना चहिए ।

5. ढाल बरामदा रखने पर यह ईस्ट या नार्थ की तरफ ही हो किसी भी हालत में वेस्ट और साउथ में नहीं होने चहिए ।

6. चबूतरा बनवाना हो तो यह सिर्फ साउथ और वेस्ट दिशाओं में ही हो क्योंकि यह निर्माण मकान के फर्श (floor) से उँचा होगा ।

7. चारदीवारी (boundry wall) होने पर उसकी उंचाई ईस्ट और नार्थ में कम तथा वेस्ट और साउथ में ज्यादा हो ।

8. मकान की दीवारें सदैव सीधी (always straight) होनी चाहिऐ ।

9. घर में इस्तेमाल किया हुआ और बरसात का पानी नार्थ-ईस्ट से ही बाहर जाना चाहिये । ऐसा न हो सकने पर सारा पानी नार्थ-ईस्ट में जमा करके फिर किसी भी दिशा (साउथ-वेस्ट को छोड़कर) से बाहर निकाल सकते हैं ।

10. ईस्ट और नार्थ की ओर बड़े पेड़ (tree), बड़ी इमारतें या पहाड़ (mountain) नहीं होने चाहिये, यह सिर्फ वेस्ट और साउथ में ही होने चाहिए ।

11. इस्ट और नार्थ में सड़क होने पर यह मकान के नीचे तल में ही हो ।

12. जगह के ईस्ट तथा नार्थ में तालाब, नाला आदि का होना शुभ है ।

13. मकान की दीवारें हमेशा सीधी हों ।

14. रसोई (kitchen) सदैव साउथ-ईस्ट या नर्थ-वेस्ट में ही रखें ।

15. घर का भारी सामान जैसे अलमारी (almirah), स्टोर रूम, पानी की टंकी सदैव साउथ-वेस्ट में ही रखनी चाहिऐ ।

16. घर के नार्थ-ईस्ट में कम वजन व हल्का (light weight) सामान रखें ।

17. घर की छत पर दूसरी मंजिल बनाने पर वह सिर्फ साउथ और वेस्ट की तरफ ही बनाएें या पूरी छत पर निर्माण होना चाहिये ।

18. घर व छत के फर्श का ढाल साउथ से नार्थ या वेस्ट से ईस्ट की तरफ हो तो निवासी सुखी रहेंगे ।

19. मकान मालिक के सोने का कमरा (sleeping room) साउथ-वेस्ट में तथा बच्चों का कमरा (kids room) नार्थ-वेस्ट में शुभ है ।

20. चारदीवारी होने पर, इससे जुड़ते हुए किसी भी तरह का निर्माण न करें । चारदीवारी के अन्दर चारों तरफ खाली जगह (vacant place) छोड़कर ही मकान का निर्माण करें ।

21. घर की चारदीवारी के किसी कोने पर निर्माण करना अनिवार्य (compulsory) हो तो पूरी चारदीवारी पर ही निर्माण करें । साथ ही घर की दीवार से हटकर कमरों का निर्माण करें ।

22. घर के मुख्य द्वार (main door) के सामने नार्थ और ईस्ट में पेड़ नहीं होने चाहिए।

23. घर का कोई कोना या बॉलकॉनी (balcony) गोल न बनायें । उसे सीधा रखें तो वास्तु दोष नहीं लगेगा ।

24. किसी प्लॉट (plot) में दिशायें कोनों पर आयें तो ऐसे प्लॉट को विदिशा प्लाट कहा जाता है इस दशा में मकान निर्माण में ऊपर दिये गये सामान्य नियम ही प्रभावी होंगे ।

25. विदिशा प्लॉट होने पर नार्थ-ईस्ट को छोड़कर और किसी भी तरफ ढाल बरामदा नहीं होना चाहिए ।

26. घर के मध्य भाग को ब्रह्मस्थान कहते हैं । इस स्थान पर किसी तरह का निर्माण जैसे दीवार, सीढ़ी, गड्ढा नहीं होना चाहिए ।

27. ईस्ट, नार्थ, नार्थ-ईस्ट की तरफ मलवा व कूड़ा-करकट (garbage) इत्यादि न डालें ।

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