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जानिये दूध के बारे में के क्यों है पृथ्वी पर दूध अमृत समान
जानिये दूध के बारे में के क्यों है पृथ्वी पर दूध अमृत समान

जानिये दूध के बारे में के क्यों है पृथ्वी पर दूध अमृत समान | Jaaniye doodh ke baare mein ke kyon hai prithvi par doodh amrit samaan




जानिये दूध के बारे में के क्यों है पृथ्वी पर दूध अमृत समान | Jaaniye doodh ke baare mein ke kyon hai prithvi par doodh amrit samaan

महर्षि चरक के अनुसार –“वयः पथ्यं यथाअमृतं” अर्थात दूध अमृत समान भोजन है |

दूध में प्रोटीन (protein), कार्बोहाईड्रेट (carbohydrate), लैक्टोज [ दुग्ध शर्करा ] खनिज लवण, वसा एवं विटामिन ए.बी. सी.डी. व् ई. विद्यमान होने के कारण यह शारीर निर्माण, संरक्षण एवं पोषण हेतु अमृत तुल्य है |

धारोष्ण दूध :- धारोष्ण दूध का अर्थ है – स्तनों से तुरंत निकला हुआ दूध | वास्तव में धारोष्ण दूध का सेवन परम उपयोगी (helpful) होता है क्योंकि सामान्यतः वायु, पृथ्वी, अग्नि, आकाश के स्पर्श या फिर थोड़ी -थोड़ी देर में पीने से दूध का अधिकांश गुण नष्ट (damage) हो जाता है |

नियम तो यह है कि दूध पिलाने एवं पीने वाले के शरीर का तापमान समान (same temperature) होना चाहिए | छोटे बच्चों के लिए माँ का दूध इसीलिए सर्वोत्तम आहार कहा गया है क्योंकि बच्चे दूध को माँ के स्तन में मुंह लगाकर उसमें बिना हवा लगे प्राकृतिक रूप (natural type) से ग्रहण करते हैं |

दुग्ध कल्प :– प्राकृतिक चिकित्सा में अधिकांशतः देशी गाय जो शुद्ध प्राकृतिक आहार करती हो उसके दूध से “कल्प” कराया जाता है | ह्रदय से सम्बंधित कुछ रोगों को छोडकर कोई भी रोग (disease) ऐसा नहीं है जो “दुग्ध कल्प” से न मिट सके, परन्तु यह कल्प किसा प्राकृतिक चिकित्सालय में रहकर चिकित्सक (treatment) की देखरेख में ही करना उचित है | इस लेख में ‘दुग्ध चिकित्सा’ के अंतर्गत गाय के दूध,घी,दही के कुछ अनुभूत घरेलु प्रयोग (home use) दिए जा रहे हैं |

पीलिया :- चालीस ग्राम गाय के दही में दस ग्राम हल्दी (turmeric) का चूर्ण मिलाकर प्रातः खाली पेट एक सप्ताह तक सेवन करें

पेचिश:- 25 मि.ली. गाय के ताजे दूध को गुनगुना (boil) करने के बाद लगभग 10 ग्राम शहद (honey) मिलाकर रखें | तत्पश्चात एक कटोरी में एक चौथाई नींबू का रस (lemon drops) निकल कर रखें |अब इस कटोरी में दूध को डालकर जल्दी से पी लें ताकि दूध नींबू रस के कारण पेट में पहुँचते-पहुँचते फट जाये | प्रातः सांय दोनों समय इसे प्रयोग करें | कुछ ही दिनों में पेचिश जड़ से समाप्त (finish from roots) हो जाएगी |

बबासीर :- पांच ग्राम गाय के घी में दो ग्राम जायफल घिसकर मिला लें | इस मिश्रण को बबासीर (piles) के मस्सों पर लगाने से उनका दर्द समाप्त हो जाता है | पचास ग्राम गाय के मक्खन में दस ग्राम बारीक़ पिसा हुआ सेंधा नमक (salt) मिलाएं | इस मलहम को बबासीर के मस्सों पर प्रातः सांय शौच (toilet) के उपरांत लगाने से मस्से नष्ट हो जाते हैं |

बीस ग्राम मक्खन (butter) के साथ चालीस ग्राम काले तिल का चूर्ण मिलाकर प्रातः खाली पेट सेवन करने से 21 दिन में बबासीर के मस्से नष्ट हो जायेंगे | खट्टी छाछ के साथ मसूर की दाल का पानी मिलाकर पीने से बबासीर का रक्तस्राव (bleeding) बंद हो जाता है |

कब्ज :- गाय (cow) का ताजा मट्ठा 250 मी.ली. के साथ 5 ग्राम अजवाईन का चूर्ण मिलाकर प्रातः खाली पेट पीने से कब्ज (indigestion) दूर हो जाता है |

तीन दिन का रखा हुआ 250 मी.ली खट्टा मट्ठा प्रातः खाली पेट लेने से कब्ज दूर हो जाता है |

250 मी.ली गाय के दूध में चार अंजीर एवं आठ मुनक्के डालकर उबालें | एक उफान आने के बाद उस दूध को धीरे-धीरे पियें (drink it slowly)| दूध में पड़े अंजीर एवं मुनक्के को चबा-चबाकर खाएं | कब्ज दूर होने के साथ ही आँतों को भी बल मिलेगा एवं शरीर की जीवनी शक्ति (power) भी बढ़ेगी |

मुंह के छाले :- रात को सोते समय छालों पर दूध की मलाई लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं | प्रातः खाली पेट गाय के दही के साथ पका हुआ चित्तीदार केला (banana) खाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं |

बालों के पोषण हेतु :- गाय के दही को तांबे के बर्तन (copper crockery) में डालकर उसे तब तक घोटें जब तक दही में हरापन न आ जाये | अब इस दही को सिर पर लेप करने के पश्चात् तीस मिनट बाद सिर को धोएं | साबुन का प्रयोग न करें (avoid soap)| इससे बालों के रोग दूर होंगे एवं गंजेपन (baldness) में भी लाभ होगा | एक दिन पुराने [बासी] मट्ठे से बाल धोने से बालों का झड़ना बंद हो जायेगा |

एग्जिमा :-एक सूती कपड़े (cotton cloth) की पट्टी को दो-तीन तह करके गाय के कच्चे दूध में भिगोने के पश्चात् उसे एग्जिमायुक्त स्थान पर दस मिनट तक रखें लगभग एक सप्ताह में एग्जिमा की खुजली (itching) समाप्त हो जाएगी | खुजली समाप्त होने के बाद एग्जिमा पर गाय का मक्खन मल कर लगाने से कुछ दिनों में एग्जिमा समाप्त हो जाता है |

चेहरे की सुन्दरता हेतु :- 10 ग्राम मसूर की दाल, 10 ग्राम हल्दी और 10 ग्राम बेसन को रात में 60 मि.ली. कच्चे दूध में भिगो दें | प्रातः काल इन सब को पीसकर उबटन की भांति लगाने के पश्चात स्नान (bath) करें | इस प्रयोग से मुंहासे, चेचक के दाग, स्त्रियों के चेहरे के अनावश्यक बाल,झाँई आदि नष्ट हो जाते हैं |

ऊपर दिए गये सभी प्रयोग लाभदायक (helpful) हैं जिन्हें व्यक्ति घर में आसानी (easily at home) से कर सकता है , परन्तु यदि इन प्रयोगों को करने के साथ -साथ प्राकृतिक चिकित्सा (natural treatment) की मिटटी,पानी,धूप,हवा एवं आकाश तत्व द्वारा विकसित वैज्ञानिक उपचार (scientific treatment) विधियों के माध्यम से शरीर का शोधन कर विकार [विष- poison] मुक्त कर लिया जाये तो|

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