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नवसंवत्सर : भारतीय कालगणना का शुभ पर्व | Navsanvtsar Bhartiya kaal gan na ka shubh parva




नवसंवत्सर : भारतीय कालगणना का शुभ पर्व | Navsanvtsar Bhartiya kaal gan na  ka shubh parva

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवसंवत्सर का आरंभ (start) होता है, यह अत्यंत पवित्र तिथि है। इसी तिथि से पितामह ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण प्रारंभ किया था। वस्तुतः नवसंवत्सर भारतीय काल गणना का आधार पर्व है जिससे पता चलता है कि भारत का गणित (maths of india) एवं नक्षत्र विज्ञान (science) कितना समृद्ध है।

 ‘चैत्रे मासि जगद् ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि।
शुक्ल पक्षे समग्रे तु तदा सूर्योदये सति।’
 
इस तिथि को रेवती नक्षत्र में, विष्कुंभ योग में दिन के समय भगवान (bhagwan/ god) के आदि अवतार मत्स्यरूप का प्रादुर्भाव भी माना जाता है-

‘कृते च प्रभवे चैत्रे प्रतिपच्छुक्लपक्षगा,
रेवत्यां योगविष्कुम्भे दिवा द्वादशनाडिकाः ।
मत्स्यरूपकुमार्या च अवतीर्णों हरिः स्वयम्‌।’

युगों में प्रथम सत् युग का प्रारंभ भी इस तिथि (date) को हुआ था। यह तिथि ऐतिहासिक महत्व (historical importance) की भी है, इसी दिन सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने शकां पर विजय प्राप्त की थी और उसे चिरस्थायी बनाने के लिए विक्रम संवत का प्रारंभ किया था।

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