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नामकरण संस्कार | Naamkaran Sanskaar




नामकरण संस्कार | Naamkaran Sanskaar

नाम न सिर्फ हमारी पहचान (identity) बताता है, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व (personality), स्वभाव, बर्ताव और भविष्य पर भी प्रभाव डालता है। नाम के इसी महत्व (importance) को ध्यान में रखते हुए हिन्दू धर्म में नामकरण संस्कार की व्यवस्था की गई है।
नामकरण संस्कार हिन्दू धर्म का (hindu religion) एक अहम संस्कार हैं। पाराशर स्मृति के अनुसार, नामकरण संस्कार जातक के सूतक व्यतीत होने के बाद करना चाहिए। नामकरण के विषय में कई वेदों-पुराणों में भी वर्णन (written) है।

भविष्यपुराण के अनुसार, लड़कों का नाम रखते समय कुछ विशेष बातों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए जैसे:

* ब्राह्मण वर्ग के बालक (boy) का नाम मंगलवाचक होना चाहिए।
* क्षत्रिय वर्ग में बालक का नाम बलवाचक होना चाहिए।
* वैश्य वर्ग में बालक का नाम धनवर्धन होना चाहिए।
* शूद्र वर्ग में बालक का नाम यथाविधि देवदासादि नाम होना चाहिए।

इसी प्रकार, लड़कियों के नाम रखते हुए निम्न बातों का ख्याल रखना चाहिए:

* लड़कियों (girls) का नाम मंगलसूचक होना चाहिए।
* ऐसा नाम नही रखना चाहिए जिसका अर्थ (meaning) ना निकलता हो या जिसके उच्चारण से कष्ट हो।
* ऐसे नाम भी नहीं रखने चाहिए जिनसे क्रूरता या युद्ध (war) आदि का भाव आए।

भविष्यपुराण के अतिरिक्त, नारदपुराण में भी शिशु के नामकरण संस्कार के लिए कई बातें बताई गईं हैं, जो निम्न हैं:

* ऐसा नाम नही रखना चाहिए जो स्पष्ट (clear) न हो।
* ऐसा नाम नही रखना चाहिए जिसका अर्थ न बनता हो
* ऐसा नाम नही रखना चाहिए जिसमें अधिक गुरु अक्षर आते हों
* ऐसा नाम नही रखना चाहिए जिसमें अक्षरों की संख्या विषम हो।

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