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पढ़ें और विचार कई दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सुविचार पर | Padhe aur vichar kare duniya ke sarvshreshta suvichar par




पढ़ें और विचार कई दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सुविचार पर | Padhe aur vichar kae duniya ke sarvshreshta suvichar par

1) बुराई से असहयोग करना मानव का पवित्र कर्तव्य है | – महात्मा गांधी (mahatma gandhi)
2) कर्म वो आईना (mirror) है, जो हमारा स्वरूप हमें दिखा देता है | अत: हमें कर्म का एहसानमंद होना चाहिए | – विनोबा भावे
3) कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता | – डिजरायली
4) दुःख पर तरस खाना मानवीय (humanity) है; दुःख दूर करना देवतातुल्य है | – होरेस मैन
5) पीड़ा पाप का परिणाम (result) है | – महात्मा बुद्ध (mahatma buddha)
6) विपत्ति हीरे (diamond) की धुल है, जिससे परामात्मा अपने रत्नों को चमकाता है | – लेटन
7) क्रोध मस्तिष्क (brain) के दीपक को बुझा देता है | – इंगरसोल
8) जब क्रोध में हों, तो दस बार सोचकर बोलिए, जब ज्यादा क्रोधित अवस्था में हों, तो हजार बार सोचिए (think)| – जेफरसन
9) जो मनुष्य अपने क्रोध (own anger) को अपने ही ऊपर झेल लेता है, वह दूसरों के क्रोध से बच जाता है | – सुकरात
10) किसी के प्रति मन में क्रोध लिये रहने की अपेक्षा उसे तुरंत प्रकट कर देना अधिक अच्छा है, जैसे क्षणभर में जल (burn) जाना देर तक सुलगने से अधिक अच्छा है | – वेदव्यास
11) खुशी तन्दुरुस्ती है, इसके विपरीत (opposite) उदासी रोग है | – हेली बर्टन
12) प्रसन्नता परमात्मा की दी हुई औषधी (medicine) है | – स्वेट मार्डन
13) गरीब (poor) वह है, जिसका खर्च आमदनी से ज्यादा है | – बुएयर
14) गरीबी विनम्रता की परीक्षा और मित्रता (friendship) की कसौटी है | – हैजलिट
15) निर्धनता प्रकट करना निर्धन होने से अधिक दुखदायी (painful) होता है | – प्रेमचन्द
16) ग़लती तो हर मनुष्य कर सकता है, किन्तु उस पर दृढ़ केवल मुर्ख (stupid) ही होते हैं | – सिसरो
17) जो गलतियाँ नहीं करता, वह प्राय कुछ नहीं कर पाता | – ए. जे. फेलप्स.
18) बहुत-सी तथा बड़ी गलतियाँ किए बिना कोई आदमी बड़ा और महान नहीं बनता | – ग्लेडस्टन
19) चरित्र वृक्ष (tree) है, प्रतिष्ठा छाया | – लिंकन
20) दुर्बल चरित्र का व्यक्ति उस सरकंडे जैसा है, जो हवा के हर झोंके पर झुक (bend) जाता है | – माघ
21) खाने और सोने का नाम जीवन (life) नहीं है | जीवन नाम है सदैव आगे बढ़ते रहने की लगन का | – प्रेमचन्द
22) मनुष्य का जीवन इसलिए है कि वह अत्याचार के खिलाफ (against) लड़े | – सुभाषचन्द्र बोस

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