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परिवार के सदस्य दूर हो या पास, ऐसे रखें उन्हें अपने करीब | Parivar ke sadasya door ho ya paas aise rakhe unhe apne kareeb




परिवार के सदस्य दूर हो या पास, ऐसे रखें उन्हें अपने करीब  | Parivar ke sadasya door ho ya paas aise rakhe unhe apne kareeb

परिवार (family) में कई बार ऐसा होता है कि हम किसी सदस्य के बहुत करीब हो जाते हैं और अन्य सदस्य अनदेखे होने लगते हैं। तीन भाई हों तो दो में ज्यादा प्रेम हो जाता है, तीसरा खुद को उपेक्षित समझने लगता है। ऐसी स्थिति में किसी को करीब रखने के ये हैं दो तरीके…

1. जो पास है, उसे अपनी निकटता से करीब रखना चाहिए।

2. जो दूर है, उसे अपने शब्दों से अपने पास बनाए रखना चाहिए।

श्रीराम (shri ram ji) ने भरत और लक्ष्मण को ऐसे रखा अपने करीब

श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न चार भाई, दो-दो के दल में। लक्ष्मण और शत्रुघ्न दोनों सगे भाई हैं, लेकिन दोनों ही अलग-अलग बड़े भाइयों के साथ रहते हैं। इस रिश्ते की सबसे बड़ी बात जो सीखने लायक है, वो ये कि श्रीराम के साथ हमेशा रहते तो लक्ष्मण हैं, लेकिन वे हमेशा अपना सबसे प्रिय भाई (loving brother) भरत को कहते हैं। लक्ष्मण दिन रात सेवा करते हैं। पूरे वनवास में साथ रहे। पत्नी को छोड़ा। फिर भी सबसे प्यारा भाई है भरत। फिर भी लक्ष्मण ने कभी श्रीराम से ये नहीं कहा कि भैया मैं आपको सबसे प्रिय क्यों नहीं हूं। चुपचाप सेवा की।
लक्ष्मण इस बात की गहराई को जानते थे कि श्रीराम उन्हें भी उतना ही प्रेम करते हैं, तभी तो साथ में रखते हैं हमेशा। अगर प्रेम नहीं होता तो साथ रखते ही क्यों, ये सुख भरत के पास नहीं है। श्रीराम को सभी भाई प्रिय थे। लक्ष्मण (laxman) को अपनी निकटता दी। भरत को अपने शब्दों से सदैव अपने करीब रखा। दोनों के लिए समान प्रेम दिखाया।
हम भी इस बात की गहराई को समझें। रिश्ते (relations) आपसी समझ से ही चलते हैं। बड़े अपना व्यवहार ठीक रखें और छोटे उनको समझने में भूल ना करें, तो परिवार (family) हमेशा सुखी व शांत रहेगा।

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