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बच्चों की उन्नति चाहते हैं तो आजमाएं यह वास्तु टिप्स | Bachcho ki unnati chahiye to aajmaayein yeh vaastu tips




बच्चों की उन्नति चाहते हैं तो आजमाएं यह वास्तु टिप्स| Bachcho ki unnati chahiye to aajmaayein yeh vaastu tips

घर में बच्चों का कमरा पूर्व, उत्तर, पश्चिम या वायव्य में हो सकता है। दक्षिण, नैऋत्य या आग्नेय में बच्चों का कमरा (kids room) नहीं होना चाहिए। बच्चों के कमरे की सजावट पूर्ण रूप से उनके अनुकूल होनी आवश्यक है तभी वे निरोग रहते हुए उच्च शिक्षा (higher study) की ओर अग्रसर होंगे। सर्वप्रथम बच्चों के कमरे का रंग-रोगन पूर्ण रूप से उनके शुभ रंग के अनुसार होना चाहिए।

गृह स्वामी को अपने घर के संपूर्ण वास्तु-विचार के साथ अपने बच्चों के कमरे के वास्तु का भी ध्यान रखना चाहिए। बच्चों की उन्नति के लिए उनका वास्तु अनुकूल ग्रह अथवा कमरे में निवास करना आवश्यक (important) है।

घर में बच्चों का कमरा पूर्व, उत्तर, पश्चिम या वायव्य में हो सकता है। दक्षिण, नैऋत्य या आग्नेय में बच्चों के कमरे की सजावट (kids room decoration) पूर्ण रूप से उनके अनुकूल होनी आवश्यक है तभी वे निरोग रहते हुए उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर होंगे।

सर्वप्रथम बच्चों के कमरे का रंग-रोगन पूर्णरूप से उनके शुभ रंग के अनुसार होना चाहिए। आपके बच्चों की जन्मपत्रिका में लग्नेश, द्वितीयेश, पंचमेश ग्रहों में से जो सर्वाधिक रूप से बली हो अथवा बच्चे की राशी ग्रह के अनुसार उसके कमरे का रंग तथा पर्दे होने चाहिए।

यदि बच्चे एक या उससे अधिक हों तो जो बच्चा बड़ा हो तथा महत्वपूर्ण विद्यार्जन कर रहा हो, उस अनुसार दीवारों का रंग (wall color) होना चाहिए। यदि दोनों हमउम्र हों तो उनके कमरे में दो भिन्न-भिन्न शुभ रंगों का प्रयोग किया जा सकता है।

पर्दों का रंग दीवार के रंग से थोड़ा गहरा होना चाहिए। बच्चों का पलंग अधिक ऊंचा नहीं होना चाहिए तथा वह इस तरह से रखा जाए कि बच्चों का सिरहाना पूर्व दिशा की ओर हो तथा पैर पश्चिम की ओर। बिस्तर (bed) के उत्तर दिशा की ओर टेबल (table) एवं कुर्सी (chair) होनी चाहिए। पढ़ते समय बच्चे का मुंह पूर्व दिशा की ओर तथा पीठ पश्चिम दिशा की ओर होनी चाहिए। यदि कम्प्यूटर भी बच्चे के कमरे में रखना हो तो पलंग से दक्षिण दिशा की ओर आग्नेय कोण में कम्प्यूटर(computer)  रखा जा सकता है।

यदि बच्चे के कमरे का दरवाजा (door) ही पूर्व दिशा में हो तो पलंग दक्षिण से उत्तर की ओर होना चाहिए। सिरहाना दक्षिण में तथा पैर उत्तर में। ऐसी स्‍थिति में कम्प्यूटर टेबल के पास ही पूर्व की ओर स्टडी टेबल स्थित होनी चाहिए। नैऋत्य कोण में बच्चों की पुस्तकों की रैक (book shelf) तथा उनके कपड़ों वाली अलमारी होनी चाहिए।

यदि कमरे से ही जुड़े हुए स्नानागार तथा शौचालय (bathroom and toilet) रखना हो तो पश्चिम अथवा वायव्य दिशा में हो सकता है। बच्चों के कमरे में पर्याप्त रोशनी आनी चाहिए। व्यवस्था ऐसी हो कि दिन में पढ़ते समय उन्हें कृत्रिम रोशनी की आवश्यकता ही न हो। जहां तक संभव हो सके, बच्चों के कमरे की उत्तर दिशा बिलकुल खाली रखना चाहिए।

उनके किताबों की रैक नैऋत्य कोण में स्थित हो सकती है। खिड़की, एसी तथा कूलर (a.c and cooler) उत्तर दिशा की ओर हो। बच्चों के कमरे में स्‍थित चित्र एवं पेंटिंग्स की स्‍थिति उनके विचारों को प्रभावित करती है इसलिए हिंसात्मक, फूहड़ एवं भड़काऊ पेंटिंग्स एवं चि‍त्र बच्चों के कमरे में कभी नहीं होना चाहिए।

महापुरुषों के चित्र, पालतू जानवरों के चित्र, प्राकृतिक सौंदर्य वाले चित्र तथा पेंटिंग्स बच्चों के कमरे में हो सकती हैं। भगवान गणेश तथा सरस्वतीजी का चित्र कमरे के पूर्वी भाग की ओर होना चाहिए। इन दोनों की देवी-देवताओं को बुद्धिदाता माना जाता है अत: सौम्य मुद्रा में श्री गणेश (shri ganesh ji) तथा सरस्वती की पेंटिंग या चि‍त्र बच्चों के कमरे में अवश्य लगाएं।

आपका बच्चा जिस क्षेत्र में करियर (career) बनाने का सपना देख रहा है, उस करियर में उच्च सफलता प्राप्त व्यक्तियों के चित्र अथवा पेंटिंग्स भी आप अपने बच्चों के कमरे में लगा सकते हैं। यदि बच्चा छोटा हो, तो कार्टून आदि की पेंटिंग्स (cartoon paintings) लगाई जा सकती है।

बच्चों के कमरे में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि घर में होने वाला शोरगुल उन्हें बिलकुल बाधित न करे अत: बच्चों के कमरे से घर की तरफ कोई खिड़की (window) या झरोखा खुला हुआ नहीं होना चाहिए।

बच्चों की श्रेष्ठ उन्नति के लिए उनके कमरे का वास्तु के अनुकूल होना आवश्यक है। वास्तु अनुरूप परिवर्तन से आपके बच्चे के मानसिक विकास (mental growth) एवं उसकी ग्रहण क्षमता में शुभ परिवर्तन नजर आएगा। इस वास्तु परिवर्तन के पश्चात बच्चा मन लगाकर पढ़ेगा तथा उसका स्वास्थ्य (health) भी अनुकूल रहेगा।

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