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मधुमेह का इलाज| Madhumeh ka ilaaj| Diabetes ka ilaaj




मधुमेह का इलाज| Madhumeh ka ilaaj| Diabetes ka ilaaj 

* देश में लगभग दो करोड़ दस लाख लोग मधुमेह की बीमारी से पीड़ित हैं।

* एक आयुर्वेदिक पौधा (ayurvedic plant) ऐसा है जो इस खतरनाक बीमारी (dangerous disease) से राहत दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस आयुर्वेदिक पौधे का नाम है स्टीविया।
* स्टीविया (मधुरगुणा) इसमें मधुमेह तक मिटाने का गुण है। अब इसने चीनी (sugar) की जगह लेनी शुरू कर दी है। इससे तैयार उत्पाद (product) न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि दिल के रोग (heart problem) और मोटापे से पीड़ित लोगों के लिए भी फायदेमंद हैं। यही नहीं इसके पौधे में कई औषधीय व जीवाणुरोधी गुण हैं।
* हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर (आइएचबीटी) ने 2000 में इसका अनुसंधान व शोध (research) कार्य शुरू किया

स्टीविया के गुण:–
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* चीनी विभिन्न रसायनों (chemicals) से गुजरने के कारण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक (dangerous) है, जबकि स्टीविया एस्ट्रेसी कुल का बहुवर्षीय शाकीय पौधा है, जिससे मधुमेह, दिल के रोग और मोटापे (obesity) में लाभ मिलता है। इसका प्रयोग स्वाद बढ़ाने, हर्बल चाय (herbal tea) और पेय में किया जाता है। यह शरीर में शर्करा स्तर को प्रभावित नहीं करता।

क्या है स्टीविया:

* स्टीविया शाकीय पौधा है। इसको खेत में उगाया जाता है और इसकी पत्तियों (leaves) का उपयोग होता है। आइएचबीटी ने इसकी सुधरी हुई संकर प्रजातियां विकसित (develop) की हैं, जिन्हें बीज से उगाया है। व्यावसायिक (professional) तौर पर इस पौधे की पत्तियों से स्टीवियोसाइड, रेबाडियोसाइड व यौगिकों के मिश्रण को निष्पादन कर उपयोग में लाया जाता है। वैज्ञानिकों (scientists) ने इसके परिशोधन करने के लिए ऑन विनिमन रेजिन एवं पोलिमेरिक एडजौंरेंट रेजिन प्रक्रियाओं का विकास (develop) किया है।

* दक्षिण अमेरिका (south america) के पौध विविधता केंद्र में इस पौधे की उत्पत्ति हुई थी।
* स्टीविया की फसल को बहुवर्षीय फसल के रूप में उगाया जा सकता है, लेकिन यह सूखे को सहन नहीं कर सकती। इसको बार- बार सिंचाई की जरूरत होती है। पहली सिंचाई के दो या तीन दिन के बाद दूसरी बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है।
* डायबिटीज के मरीजों के लिए मीठा खाना जहर (sweet poison) नहीं बनेगा बशर्ते वह मीठा खाने के तुरंत बाद आयुर्वेदिक पौधे स्टीविया की कुछ पत्तियों को चबा लें। गन्ने (sugarcane) से तीन सौ गुणा अधिक मीठा होने के बावजूद स्टीविया पौधे फैट (fat free) व शुगर से फ्री है। इतना अधिक मीठा होने के बावजूद यह शुगर को कम तो करता ही है साथ ही इसे रोकने में भी सहायक (helpful) है।
* खाना खाने से बीस मिनट पहले स्टीविया की पत्तियों का सेवन अत्यधिक फायदेमंद होता है। अद्भुत गुणों का संगम आयुर्वेदिक पौधा घर में भी लगाया जा सकता है। एक बार
लगाया गया पौधा पांच वर्ष तक प्रयोग में लाया जा सकता है।
* स्टीविया का पौधा मधुमेह रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। स्टीविया बहुत मीठा (too sweet) होता है लेकिन शुगर फ्री होता है। स्टीविया खाने से पैंक्रियाज से इंसुलिन आसानी से मुक्त होता है।
* आपको दूर करना हो शूगर या फिर मोटापा या आ रही हो कैलोरी (calories) की दिक्कत तीनों मर्ज में स्टीविया का करेंगे यूज तो होगा लाभ भरपूर। कुछ यहीं कहना है आयुर्वेद चिकित्सकों (doctors) का, उनकी माने तो यदि रोजाना (daily) स्टीविया के चार पत्तों का चायपत्ति के रूप में सेवन किया जाए तो यह रामबाण की तरह साबित होगा।

* मौजूदा समय में शुगर, मोटापा, कैलोरी आदि रोग आम (normal) हो चुके है, रोगियों (patients) की संख्या भी बढ़ने लगी है। रोग से निजात पाने को पीड़ित लोग उपचार (treatment) के लिए अंग्रेजी दवाओं (english medicines) का सहारा ले रहे है, तो दूसरी ओर कई तरह के परहेज कर राहत पाने के प्रयास करते है। किंतु अयुर्वेद में तीनों मर्ज के हरबल प्लांट (herbal plant) स्टीविया पौधे का उल्लेख किया गया है, जिस पर आयुर्वेद चिकित्सकों को अभी भी विश्वास (trust) कायम है। उनकी माने तो स्टीविया साइट नाम का एक रसायन होता है, जोकि चीनी से तीन सौ गुना अधिक मीठा होता है, इसे पचाने (digestion) से शरीर में एंजाइम नहीं होता और न ही ग्लूकोस की मात्रा बढ़ती है।

अब आपको मिठास को तरसने की जरूरत नहीं:-
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* अक्सर डाक्टर शुगर के मरीजों से चीनी के सेवन न करने की हिदायद देते है। ऐसे में इस बीमारी से पीड़ित काफी समय के लिए मिठास को तरस जाते है। किंतु शुगर के मरीज स्टीविया में चीनी से अधिक मिठास होने के चलते मीठास को तरसेंगे भी नहीं और इसके लगातार सेवन से शुगर पर नियंत्रण (control) पाया जा सकता है।

मोटापा भी होगा दूर:-
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* आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार स्टीविया से शुगर के अलावा मोटापे से भी निजात पाई जा सकती है। मोटापे के शिकार व्यक्तियों के लिए भी यह पौधा किसी वरदान से कम नहीं है। शुगर ही मोटापे का कारण बनती दिखाई दे रही है, यदि शुगर न भी हो और इसका सेवन किया जाए तो न ही शुगर होने की नोबत बन पाएगी और न ही मोटापा हो

कैलोरी भी नहीं बढती :-
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* आज कैलोरी की प्रोबलम (problem) भी काफी बढने लगी है ऐसे में भले ही स्टीविया चीनी से अधिक मीठा हो किंतु इसमें ग्लूकोस (glucose) की मात्रा न होने के चलते इससे कैलोरी के अनियंत्रित (uncontrolled) होने की संभावना नहीं रहती। यही कारण है कि स्टीविया का मौजूदा समय में कई शुगर फ्री पदार्थो (sugar free liquids) को बनाने के लिए भी प्रयोग किया जाने लगा है।

खासियत क्या है इसमें :-
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* स्टीविया में शुगर, मोटापा, कैलोरी को दूर करने के अलावा कई खूबियों का वर्णन आयुर्वेद में मिलता है…..!
* शक्कर से 25 गुना ज्यादा मीठा परंतु शक्कर रहित (sugarless) है।
* 15 आवश्यक खनीजों तथा विटामिन्स (vitamins) होते है।
* पूर्णतया कैलोरी शून्य उत्पाद।
* इसे पकाया जा सकता है आर्थात इसे चाय, काफी, दूध आदि के साथ उबालकर (boil) भी प्रयोग किया जा सकता है।
* मधुमेय रोगियों के लिए उपयुक्त है क्योकि यह पेनक्रियाज (pancreas) की बीटा कोशिकाओं पर अपना प्रभाव डालकर उन्हें इन्सुलिन (insulin) तैयार करने में मदद करता है।
* दांतो की केवेटीज, बैक्टीरिया (bacteria) , सड़न आदि को भी रोकता है।
* ब्लड प्रेशर (blood pressure) में नियंत्रित करता है।
* इसमें एंटी एजिंग, एंटी डैंड्रफ (anti dandruff जैसे गुण पाये जाता है तथा नॉन फर्मन्टेबल होता है।

स्टीविया के सेवन से नहीं बढ़ता ग्लूकोस:-
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* अमुमन, शुगर के मरीज का मीठा खाने से ग्लूकोस बढ़ता है, इसी कारण उसे तकलीफ (pain) होती है। ऐसे में यदि वह मीठे के स्थान पर स्टीविया का सेवन करता है, तो इसमें ग्लूकोस की मात्रा नहीं होती और साथ ही यह मीठे का काम भी करता है। ऐसे में इसका सेवन शुगर के रोगियों के लिए लाभकारी (helpful) साबित होता है।

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