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विश्वामित्र की तपस्या क्यों भंग की गई? | Vishwamitra ji ki tapasya kyon bhang ki gayi




विश्वामित्र की तपस्या क्यों भंग की गई? | Vishwamitra ji ki tapasya kyon bhang ki gayi

पुराणों में इंद्र को हमेशा अपने सिंहासन के लिए शंकित और सुरक्षा (safety) के लिए चिंतित बताया गया है। जब भी कोई तपस्या करता है, इंद्र इससे चिंतित और भयभीत (fear/afraid) रहते हैं कि इसका लक्ष्य (target) उनका सिंहासन प्राप्त करना है। एक बार जब विश्वामित्र ने कठिन तप किया, तब ऐसे ही भय से ग्रसित हो इंद्र ने उनकी तपस्या भंग करने का षडयंत्र किया। महाभारत (mahabharat) के आदिपर्व में शकुंतला के जन्म व रहस्य की कथा है। इस कथा के अनुसार विश्वामित्र की तपस्या को भंग करने के लिए इंद्र ने अपनी अप्सरा मेनका को भेजा।

मेनका ने वातावरण सुगंधित (scented atmosphere) करने के लिए वायु देवता व काम देवता का सहयोग मांगा। इसलिए मेनका के सौंदर्य (beauty) से वशीभूत हो विश्वामित्र की तपस्या भंग हो गई। विश्वामित्र से मेनका ने एक पुत्री को जन्म दिया और स्वयं स्वर्ग (heaven) चली गई। कण्व मुनि को यह बालिका हिमालय पर मालिनी नदी के निकट मिली। कण्व ने इसका नाम शकुंतला रखा और अपने आश्रम ले आए। यहीं पली-बढ़ी शकुंतला ने युवावस्था (young age) में दुष्यंत से गंधर्व विवाह (marriage) कर पुत्र भरत को जन्म दिया, जिसके नाम पर भरत वंश और देश का नाम भारत पड़ा।

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