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शिव के आंसू से उत्पन्न हुआ रुद्राक्ष, जानें पूरी कहानी | Shiv ke Ansoo se utpann hue Rudraksh, jaane poori kahani




शिव के आंसू से उत्पन्न हुआ रुद्राक्ष, जानें पूरी कहानी| Shiv ke Ansoo se utpann hue Rudraksh, jaane poori kahani

आध्यात्मिक (Spiritual) दृष्टि से अनेक पेड़-पौधों का काफी महत्व है। उसी में एक वृक्ष है रुद्राक्ष। रुद्राक्ष (Rudraksh) के दर्शन और स्पर्श मात्र से ही पापों का विनाश हो जाता है। जानें रुद्राक्ष के उत्पन्न होने की कहानी-

भगवान शिव (Bhagwan Shri Shiv Ji) ने देवी पार्वती को रुद्राक्ष की महिमा को बताया था, जिसका उल्लेख शिवपुराण (Shri Shivpuran) में मिलता है। शिव के आंसुओं से उत्पन्न हुआ है रुद्राक्ष। यही कारण है कि शिव को अति प्रिय है रुद्राक्ष।दरअसल रुद्राक्ष दो शब्दों रुद्र और अक्ष से मिलकर बना है। रुद्राक्ष शब्द के पीछे छिपी गूढ़ता को जानें तो रुद्र का अर्थ है दु:खों का नाश करने वाले वहीं अक्ष का अर्थ है आंखे यानी रुद्राक्ष शिव के नेत्रों से निकला पीड़ा हरण करने वाला है।

कहते हैं एक बार भगवान शिव घोर तपस्या कर रहे थे। एक दिन उनका मन क्षुब्ध हो गया और उन्होंने लीला वश अपने नेत्रों को खोल दिया। जिसके बाद उनके नेत्रों से कुछ जल की बूंदें गिरी। आंसू की इन बूदों से रुद्राक्ष उत्पन्न हो गया। इसी रुद्राक्ष को उन्होंने विष्णु भक्तों और चारों वर्णों में वितरित कर दिया।

भगवान शिव ने रुद्राक्ष को गौड़ प्रदेश में उत्पन्न किया और मथुरा, अयोध्या, लंका और काशी सहित अन्य स्थानों पर इसके अंकुर उगाए। शिव जी की आज्ञा से रुद्राक्ष चार वर्णों में भुतल पर प्रकट हुआ। रुद्राक्ष के ये चार रूप चार वर्णों के लिए ही उत्पन्न हुए। रुद्राक्ष के चार वर्ण हैं श्वेत, रक्त, पीत और कृष्ण।

शिव-पार्वती (Shri Shiv Parvati Ji) को प्रसन्न करने के लिए रुद्राक्ष धारण करना उत्तम है। रुद्राक्ष के अनेक आकार हैं। आंवले के फल के बराबर रुद्राक्ष को श्रेष्ठ बताया गया है। मध्यम श्रेणी का रुद्राक्ष बेर के बराबर होता है। चने के बराबर का रुद्राक्ष निम्न कोटि का माना जाता है।

शिवपुराण के मुताबिक बेर फल के बराबर का रुद्राक्ष सुख, सौभाग्य में वृद्धि करता है। आंवले के समान रुद्राक्ष समस्त कष्टों का विनाश करने वाला होता है। कहते हैं रुद्राक्ष, जितना छोटा होता है उतना अधिक फल प्रदान करता है। रुद्राक्ष की माला फलदायिनी होती है।

रुद्राक्ष को धारण करना कल्याणकारी होता है। जहां रुद्राक्ष की पूजा होती है वहां से लक्ष्मी दूर नहीं होती है। वहां कोई अनिष्ट नहीं होता है और सम्पूर्ण कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

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