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शेर झुंड में ही क्यों नज़र आते हैं? | Sher Jhund mein hi kyon nazar aate hai ?




शेर झुंड में ही क्यों नज़र आते हैं? | Sher Jhund mein hi kyon nazar aate hai ?

पिछले कई दशकों में शेर का ख़ासा शिकार हुआ है और इस वजह से दुनिया में शेरों की आबादी ख़ासी घट गई है.

बहरहाल, शेर की दहाड़ अच्छों अच्छों के होश उड़ा देती है. इस विशालकाय जानवर से दूसरे जानवर ही ख़ौफ़ज़दा नहीं होते, बल्कि इंसानों भी दहशत में आ जाता हैं.

क्या आपको पता है कि शेर पृथ्वी पर लगभग 1,24,000 साल से मौजूद हैं. जानिए शेर से जुड़ी 7 ख़ास बातें जो शायद आपको पता न हों.
1. शेर क्यों दहाड़तें हैं? (Why tiger roars)

शेर बिल्ली प्रजाति का जीव है. बिल्लियों की कुछ ही प्रजातियां दहाड़ सकती हैं. इनमें शेर, बाघ और जैगुआर शामिल हैं. इनके गले ऐसे होते हैं कि वे दहाड़ सकते हैं.

माना जाता है कि शेर संवाद करने के लिए दहाड़ते हैं, ख़ासकर कुछ दूरी से संवाद करने के लिए. लेकिन शोध के बावजूद हम नहीं जानते हैं कि वे इतनी तेज क्यों दहाड़ते हैं?

2010 में जर्मनी (Germany) के बॉन स्थित एलेक्जांडर कोइंग ज़ूलॉज़िकल रिसर्च म्यूज़ियम में डाॉ गुस्ताव पीटरर्स (Dr. Gustao Peters) और डॉ मार्सेल पीटर्स (Dr. Marcel Peters) ने बिल्लियों की 27 भिन्न प्रजातियों की आवाज़ की फ्रीक्वेंसी का अध्ययन किया.

हालांकि इस अध्ययन से किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका क्योंकि ध्वनि का संचार हवा के प्रतिरोध, जंगल के घनेपन आदि कई अलग-अलग बातों पर निर्भर करता है.

एक दूसरी धारणा ये भी है कि बड़ी बिल्लियां कम फ्रीक्वेंसी में आवाज़ निकालती हैं. वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया है कि बिल्लियों के शरीर के वजन का आवाज़ की फ्रीक्वेंसी से कोई रिश्ता नहीं है.

2. शेर के लंबे बालों का रहस्य (Sher ke lambe baalon ka rahasya)

बिल्लियों की ख़ासियत है कि नर शेर के गले के चारों ओर लंबे बाल होते हैं, जो फ़र की भांति लगते हैं. यह कई बार 23 सेंटीमीटर तक लंबे होते हैं. यह सफेद या काले रंग के हो सकते हैं. नर शेर के सिर, गले, कंधे और छाती पर भी बाल ही बाल होते हैं.

लंबे समय तक ये माना जाता रहा है कि ये बाल नर शेरों को लड़ने भिड़ने में घायल होने से बचाते हैं. इस विचार को चार्ल्स डारविन के कथन से भी बल मिला.

हालांकि शेरों के लंबे बालों के दूसरे कारण भी बताए जाते हैं. मादा शेर, इन बालों को देखकर ही नर शेर के प्रति आकर्षित होती हैं. ज़्यादा बाल वाले शेरों में टेस्टोसट्रोन का स्तर ज़्यादा होता है, वो कहीं ज़्यादा स्वस्थ्य और बलवान होते हैं और ज़्यादा साल जीवित रहते हैं. मादा शेरों को लगता है कि ज़्यादा बालों वाले शेर के संसर्ग से होने वाला शावक ज़्यादा स्वस्थ होगा.

2006 में अफ्रीकी शेरों पर वैज्ञानिकों ने बालों को लेकर अध्ययन किया. इस अध्ययन में वैज्ञानिकों को लंबे बालों से शेर के चोट से बचने के पक्के सबूत नहीं मिले.

इसलिए यही माना जाता है कि नर शेर अपनी बालों का इस्तेमाल मादा शेरों को रिझाने के लिए करते हैं.

3. शेर गिनती कर सकते हैं (Lions can count)

शेर में गिनती करने की अल्पविकसित क्षमता होती है. जब कोई शेर अपने करीब आते दूसरे शेरों की दहाड़ सुनता है, तो वो हमेशा अपिरिचित शेर से पहले मिलता है.

अगर कोई शेर दो बार दहाड़ता है तो मादा शेर अपनी ओर से चार बार दहाड़ मारती है. ये ठीक इसी अनुपात में आगे बढ़ता है.

इतना ही नहीं, शेर अपने आस पड़ोस में अपरिचित और परिचित दोनों तरह के शेरों की गिनती का ध्यान रखता है.

4. शेर अजीब से चेहरे बना सकते हैं (Lion Can make difference face expressions)

जब शेर किसी दिलचस्प चीज़ को सूंघता है तो यह उसके चेहरे के हाव भाव पर ज़ाहिर होने लगता है.

दरअसल, शेर के मुंह के ऊपरी हिस्से में ख़ास सेंसर जैसा अंग होता है जिसे ओमेरोनेसल अंग कहते हैं जो किसी भी रसायन या गंध को पहचानता है.

5. शेर हमेशा झुंड में रहते हैं (Sher hamesha jhund mein rehte hai)

बिल्ली प्रजाति में शेर ही है जो बड़े समूह में रहता है. अफ़्रीका और एशिया में पाए जाने वाले शेर समूहों में रहते हैं, एक या ज़्यादा नर शेर, कई मादा शेर और कई सारे शावक.

शेर इस तरह के समूह में क्यों रहते हैं? इसको लेकर दो तीन बातें कहीं जाती हैं. पहली बात तो यही है कि मादा शेर शिकार के उद्देश्य से समूह में रहना पसंद करती है. हालांकि शेर के समूह में रहने का शिकार में कितना फ़ायदा होता है, इसका कोई संकेत नहीं मिला है.

एक राय ये भी है कि शेर अपने इलाके को सुरक्षित रखने के लिए समूह में रहते हैं.

2009 में इस बात के संकेत मिले हैं कि शेर अपने इलाके को सुरक्षित रखने में दिलचस्पी लेते हैं. अमरीका के सेंट पॉल स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिनेसोटा के इकॉलोजिस्ट एना मोसेर और क्रेग पैकर के 38 साल लंबे अध्ययन में इसके संकेत मिले थे.

इस कोशिश में उनका व्यवहार गली के गैंग्स की तरह होता है. जितना बड़ा गैंग होता है उसका उतने बड़े इलाके पर कब्ज़ा होता है.

6. शेरों की उत्पत्ति का पता नहीं (Shero ki utpati ka pata nahi)

शेर का अस्तित्व काफी पुराना है. अफ्रीका में मनुष्य के विकास के साथ शेरों के अस्तित्व के संकेत मिले हैं. लेकिन शेरों की उत्पत्ति के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है. 2014 में पहली बार इनके बारे में जानकारी मिली.

शेरों के इतिहास के बारे में जानना बेहद मुश्किल हैं. जानवरों के ज़्यादा जीवाश्म नहीं मिलते. शेरों का अस्तित्व तो मानवीय गतिविधियों के चलते तेजी से ख़त्म हुआ है.

बहरहाल, डरहम यूनिवर्सिटी, ब्रिटेन के डॉ. रॉस बारनेट ने दुनिया भर के म्यूज़ियम (Museum) में रखे विभिन्न प्रजातियों के शेरों के जीवाश्म का अध्ययन किया. इस डीएनए अध्ययन के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे कि आधुनिक शेरों के पूर्वज का इतिहास 1,24,000 साल पुराना है.

आधुनिक शेर मुख्यत: दो वर्ग के हैं- एक तो वे जो पूर्वी और दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में रहते हैं. दूसरे शेर मध्य और पश्चिमी अफ्रीका (West Africa) और भारत में पाए जाते हैं. हालांकि दूसरे समूह का अस्तित्व अब कहीं ज़्यादा संकट में है.

7. शेर बेहद रहस्यमयी होते हैं (Sher bahut rahasyamayi hote hai)

शेरों की कुछ प्रजातियां बेहद रहस्यमयी होती हैं. अफ्रीका के अलावा शेर भारत में पाए जाते हैं. हालांकि गीर वन्य क्षेत्र शेर के लिए संरक्षित इलाका है.

भारत (India) में इनको संरक्षित करने की कोशिशों के चलते इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ी है.

वैसे बारबरी शेरों की प्रजाति को सबसे ज़्यादा रहस्मयी माना जाता है. इस शेर का सिर, बाल और आकार काफ़ी अलग होता है. यह शेर समूह में रहने के बदले छोटे परिवार में रहना पसंद करते थे.

इन शेरों पर मोरक्कों (Morocco) में 1927 में एक फिल्म बनी थी. वैसे इनके अस्तित्तव का अंतिम संकेत 1942 में एटलस पर्वतीय (Atlas Mountain) इलाके में है. इस प्रजाति के अस्तित्व के बारे में अभी भी अध्ययन चल रहा है.

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