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श्री विष्णु पूजन की विधि | Bhagwan Shri Vishnu Poojan ki vidhi




श्री विष्णु पूजन की विधि| Bhagwan Shri Vishnu Poojan ki vidhi

सामग्री
देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण। चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, फूल, अष्टगंध। तुलसीदल, तिल, जनेऊ। फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा ।

सकंल्प
किसी विशेष मनोकामना (special wish) के पूरी होने की इच्छा से किए जाने वाले पूजन में संकल्प की जरूरत होती है। निष्काम भक्ति बिना संकल्प के भी की जा सकती है।
पूजन शुरू करने से पहले सकंल्प लें। संकल्प करने से पहले हाथों में जल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल (water) को जमीन पर छोड़ दें।

संकल्प का उदाहरण
जैसे 21/4/2015 को श्री विष्णु (bhagwan shri vishnu ji) का पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें। मैं ( अपना नाम बोलें ) विक्रम संवत् 2072 को वैशाख मास के तृतीया तिथि को मंगलवार (tuesday) के दिन, कृतिका नक्षत्र में, भारत देश के मध्यप्रदेश (madhya pradesh) राज्य के उज्जैन शहर (ujjain city) में महाकालेश्वर तीर्थ में इस मनोकामना से (मनोकामना बोलें ) श्री विष्णु का पूजन कर रही/ रहा हूं।

श्री विष्णु पूजन की सरल विधि
सर्वप्रथम गणेश पूजन करें। गणेश जी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प, अक्षत से पूजन करें। अब भगवान विष्णु का पूजन शुरू करें।

भगवान विष्णु का आवाहन करें। आवाहन यानी कि बुलाना। भगवान विष्णु को अपने आसन दें। अब भगवान विष्णु को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं। अब भगवान को वस्त्र पहनाएं। वस्त्रों के बाद आभूषण और फिर यज्ञोपवित (जनेऊ) पहनाएं। अब पुष्पमाला पहनाएं। सुगंधित इत्र अर्पित करें। अब तिलक करें। तिलक के लिए अष्टगंध का प्रयोग करें। अब धूप व दीप अर्पित करें। भगवान विष्णु को तुलसी दल विशेष प्रिय है। तुलसी दल अर्पित करें। भगवान विष्णु के पूजन में चावल का प्रयोग नहीं किया जाता है। तिल अर्पित कर सकते हैं। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं। आरती करें। आरती के पश्चात् परिक्रमा करें। अब नेवैद्य अर्पित करें। भगवान नारायण के पूजन के समय ‘‘ऊँ नमो नारायणाय मंत्र’’ का जप कर सकते है।

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