Home » Vrat Poojan » सप्तऋषियों के पूजन का दिन ऋषि पंचमी | Saptrishiyo ke poojan ka din Rishi Panchami
dharmik
dharmik

सप्तऋषियों के पूजन का दिन ऋषि पंचमी | Saptrishiyo ke poojan ka din Rishi Panchami




सप्तऋषियों के पूजन का दिन ऋषि पंचमी  |  Saptrishiyo ke poojan ka din Rishi Panchami

ऋषि पंचमी के दिन सभी महिलाएं व कन्याएं (women’s and girls) पूरी श्रद्धा व भक्ति के साथ रखेंगी। इस दिन सप्तऋषियों का पूर्ण विधि-विधान से पूजन कर कथा श्रवण करने का महत्व है। यह व्रत महिलाओं व युवतियों के लिए आवश्यक (important) माना गया है। यह व्रत पापों का नाश करने वाला व श्रेष्ठ फलदायी है।

शास्त्रों के अनुसार ऋषि पंचमी पर हल से जोते अनाज (food) आदि का सेवन निषिद्घ है। ऋषि पंचमी के अवसर पर महिलाएं व कुंआरी युवतियां सप्तऋषि को प्रसन्न (happy) करने के लिए इस पूर्ण फलदायी व्रत को रखेंगी।

कहा जाता है कि पटिए पर सात ऋषि बनाकर दूध (milk), दही (curd), घी, शहद (honey) व जल (water) से उनका अभिषेक किया जाता है, साथ ही रोली, चावल, धूप, दीप आदि से उनका पूजन करके, तत्पश्चात कथा सुनने के बाद घी से होम किया जाएगा। जो महिलाएं ऋषि पंचमी का व्रत रखेंगी, वे सुबह-शाम दो समय फलाहार कर ही व्रत को पूर्ण करेंगी।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत में हल से जुता हुआ कुछ भी नहीं खाते हैं। इस बात को ध्यान में रखकर ही व्रत किया जाएगा। वे केवल फल (fruits), मेवा व समां की खीर, मोरधान से बने व्यंजनों को खाकर व्रत रखेंगी तथा घर-घर में भजन-कीर्तनों का आयोजन किया गया।

उल्लेखनीय है कि इस दिन रामघाट, शिप्रा नदी, तालाब आदि में स्नान (bath) करने का महत्व है। ऋषि पंचमी पर व्रत रखकर अपने ज्ञात-अज्ञात पापों के शमन के लिए हिमाद्री स्नान करेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*