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स्वयं भगवान राम ने बनाई थी पापों से मुक्त कराने वाली इस मूर्ति को | Svayam Bhagwan Shri Ram ji ne banai thi paapo se mukti karne wali is murti ko




स्वयं भगवान राम ने बनाई थी पापों से मुक्त कराने वाली इस मूर्ति को | Svayam Bhagwan Shri Ram ji ne banai thi paapo se mukti karne wali is murti ko

दुर्गादत्त के पास ज्ञान (knowledge) के अलावा कुछ नहीं था पर राजा को यह सूचना (king got the news) मिली थी कि दुर्गादत्त को हीरे-मोतियों से भरा खजाना मिला है. अहंकारी राजा ने सैनिकों को आदेश दिया की दुर्गादत्त को पकड़कर उसके सामने पेश किया जाए और खजाने को राजकोष में जमा कर दिया जाए. पर राजा को यह फैसला काफी भारी पड़ा, उसे एक ऐसा शाप (curse) मिला कि उसका जीवन दुष्कर हो गया. वह जब चावल खाता (eating rice) तो उसे कीड़े दिखाई देते और जब पानी पीता तो खून नजर आता. उसको शाप से मुक्त कराया एक मूर्ति ने जिसे प्रभु श्रीराम ने स्वयं अपने हाथों से बनाया था.

ये कहानी है 17वीं शताब्दी की जब कुल्लू (kullu) में राजा जगत सिंह राज करता था. अपने अहंकार में उसने एक बड़ा पाप कर दिया और इसके बदले उसे ऐसा खौफनाक शाप मिला जिससे उसका जीना मुहाल हो गया. एक दिन जगत सिंह को सूचना मिली कि गांव के एक पंडित दुर्गादत्त को घाटी में काम करते वक्त कुछ हीरे-मोती (diamond and jewelry) मिले हैं. राजा उसे पाना चाहता था. राजा ने सैनिकों को आदेश दिए कि दुर्गादत्त से सारे हीरे मोती छीनकर खजाने में जमा कर दिए जाए.

सैनिकों ने दुर्गादत्त को खूब मारा-पीटा लेकिन हीरे-मोती नहीं मिले. उसे आए दिन बेइज्जत किया जाने लगा और सबके सामने सजा दी जाने लगी. जब राजा ने जुल्म की हद कर दी तो दुर्गादत्त ने खुद को परिवार सहित अपने घर में ही जला डाला. पर मरने से पहले दुर्गादत्त ने राजा को शाप दिया कि जब भी वह चावल खाएगा तो उसे चावल के दानों की जगह कीड़े दिखाई देंगे. और पीने का पानी खून बन जाएगा. शाप असर करने लगा जिससे राजा का खाना पीना मुश्किल हो गया.

राजा का अहंकार टूट चुका था. वह एक संत के पास गया जिसने राजा को बताया की अगर उसे अपने शाप से मुक्ति चाहिए तो अपने राज्य में भगवान रघुनाथ (bhagwan shri raghunath ji) का मंंदिर बनवाना होगा और इसके लिए अयोध्या से मूर्ति लानी होगी. राजा ने ऐसा ही किया और अयोध्या से श्रीराम की बनाई भगवान रघुनाथ की मूर्ति लाकर कुल्‍लू में भव्य मंदिर बनवा दिया. मंदिर बनने के बाद घाटी में समृद्धि लौटने लगी. राजा ने अपना राज्य भगवान रघुनाथ को सौंप दिया. राज्य में ऐतिहासिक दशहरा (dussehra) मनाया जाने लगा. आज घाटी में भगवान रघुनाथ को सबसे बड़ा देवता माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि  हजारों देवता उनके आगे शीश झुकाते हैं.

इस तरह से त्रेता युग में भगवान श्रीराम द्वारा अयोध्या में बनाई गई यह मूर्ति हिमाचल प्रदेश (himachal pradesh) के एक मंदिर में आकर स्थापित हो गई.

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