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हस्तरेखा और आर्थिक सम्पन्नता | Hastrekha aur arthik sampannata




हस्तरेखा और आर्थिक सम्पन्नता| Hastrekha aur arthik sampannata

  1. यदि अंगुलियों (fingers) कर पर्व लम्बे हो तो जातक धनी (rich) होने के साथ-साथ दीर्घायु (long life) भी प्राप्त करता है।
  2. यदि कनिष्ठा अँगुली का नाखुन (nails) अनामिका अँगुली के द्वितीय पर्व से आगे निकलकर तीसरे पर्व तक जाये तो जातक को कभी भी धन का अभाव नहीं होता।
  3. यदि कनिष्ठा एवं अनामिका अँगुली के आपस में सटाने के उपरान्त मध्य छिद्र रहे तो वृद्धावस्था (old age) में आर्थिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।
  4. यदि मध्यमा तथा अनामिका के मध्य छिद्र हो तो जातक को युवावस्था (young age) में आर्थिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।
  5. यदि मध्यमा और तर्जनी के मध्य छिद्र हो तो बाल्यावस्था (kid life) में आर्थिक कष्ट हो।
  6. यदि किसी भी अँगुली के मध्य छिद्र न हो तो जातक का जीवन धन-धान्य से सम्पन्न रहता है।
  7. यदि मध्यमा अँगुली के तीसरे पर्व में अनामिका आकर मिल गई हो तो ऐसा जातक विद्वान, विचारवान्, साहित्यकार तथा कलाप्रेमी (Art lover) होता है तथा इस क्षेत्र में धन व यश की प्राप्ति करता है।
  8. अनामिका अँगुली सीधी, लम्बी तथा पुज़्ट होने पर जातक धनोपार्जन में प्रवीण, अनामिका टेढ़ी-मेढ़ी होने पर जातक दृढ़ रहकर धनोपार्जन करता है।
  9. अनामिका का झुकाव कनिष्ठा की ओर हो तो जातक कार्य-व्यापार द्वारा धन व सम्मान अर्जित करता है।
  10. अनामिका तर्जनी के बराबर लम्बी हो, उसका पहला पर्व चपटा एवं लम्बा हो तो जातक को धन (money) व यश की प्राप्ति होती है।
  11. अनामिका का तीसरा पर्व लम्बा हो, संधि की गांठे उन्नत हो तो बिना किसी चिन्ता के धनोपार्जन में लगा रहता है।
  12. यदि कनिष्ठा अनामिका के प्रथम पर्व को स्पर्श करती हो तो जातक यात्रा द्वारा धन की प्राप्ति करता है।
  13. महीन, स्पष्ट व गहरी भाग्य रेखा मणिबन्ध से शनि पर्वत (mountain) तक जाती हो तो मनुष्य के उद्योग धंधे में दिन-प्रतिदिन आय का स्तर बढता है।
  14. चन्द्र पर्वत से भाग्य रेखा गुरु पर्वत पर पहुँच जाए तो व्यक्ति का भाग्योदय चिचाह उपरान्त या स्त्री (lady) के द्वारा होता है।
  15. स्पष्ट चार रेखाऐं मणिबंध पर यवाकार हो तो व्यक्ति जन्म से ही धनवान (rich by birth) होता है।
  16. अंगुठे के दोनों ऊपरी पर्वों का बराबर व कठोर होना धन एवं व्यापार वृद्धिकारक माना गया है।
  17. सूर्य पर्वत (sun mountain) का उभरा हुआ होना, स्पष्ट एक रेखा का होना व चन्द्र पर्वत से भाग्य रेखा का निकलना धनागम का संकेत होता है।
  18. मणिबंध के बीच क्रॉस, यव चिह्न होने पर जातक को वसीयत के द्वारा धन की प्राप्ति होती है। यदि हथेली के नीचे मणिबंध की चार रेखाएं यवाकार हो तो ऐसा जातक ऐश्वर्यपूर्ण जीवन व्यतीत करता है।
  19. यदि जीवन रेखा से छोटी रेखायें निकलकर ऊपर की ओर जाए तो जातक उस आयु विशेष में धन एवं सम्मान प्राप्त करता है।
  20. यदि दोनों हाथों में मस्तिष्क रेखा लम्बी हो तथा चन्द्र पर्वत पर घुमावदार हो, चन्द्र पर्वत बलवान हो एवं अनामिका तथा मध्यमा अंगुली बराबर लम्बाई की हो तो जातक व्यापारी (businessman) होता है। व्यापार-व्यवसाय में आकस्मिक धन प्राप्त करता है।
  21. यदि मस्तिष्क रेखा अंत में द्विशाखायुक्त हो जाए तथा एक शाखा ह्रदय रेखा (heart line) को काटती हुई बुध क्षेत्र तक जाए तथा दूसरी शाखा चन्द्र पर्वत तक जाए तो जातक अत्यन्त चालाक एवं व्यापार से धन अर्जन करने वाला होता है।
  22. यदि मस्तिष्क रेखा से कोई शाखा निकलकर गुरु पर्वत तक जाए और उसके अंत पर क्रॉस का चिह्न (cross sign) हो अथवा कोई आड़ी रेखा हो तो ऐसे जातक को धन अर्जन में सफलता प्राप्त नहीं होती किन्तु उपरोक्त लक्षण के साथ ही यदि मणिबंध पर भी क्रॉस का चिह्न हो तो ऐसे जातक को धन प्राप्ति के संकेत हैं। यदि मस्तिष्क रेखा से कोई शाखा निकलकर गुरु पर्वत तक जाए और उसके अंत पर क्रॉस का चिह्न हो अथवा कोई आड़ी रेखा हो तो ऐसे जातक को धन अर्जन में सफलता प्राप्त नहीं होती किन्तु उपरोक्त लक्षण के साथ ही यदि मणिबंध पर भी क्रॉस का चिह्न हो तो ऐसे जातक को धन प्राप्ति के संकेत हैं।

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